zehan men vo kabhi zyaada kabhi thoda utarta tha | ज़ेहन में वो कभी ज़्यादा कभी थोड़ा उतरता था

  - Raj
ज़ेहनमेंवोकभीज़्यादाकभीथोड़ाउतरताथा
परउसकाकुछकहनाथोड़ासाज़्यादाउतरताथा
मसाइलथीगलीउसकीगुज़रनाथाबड़ामुशकिल
बड़ीमुश्किलमेंपैरोंसेमेरेरस्ताउतरताथा
नज़रमेंवोरखाकरतानज़रअंदाज़करकेभी
वोजितनीसीढ़ीचढ़ताथावोबसउतनाउतरताथा
मुझेहैयादबचपनमेंवोसीसावालेझूलेमें
वोरोती,इसलिएमैंबादमेंहँसताउतरताथा
मैंझपकीलेताबसइसज़दमें,उठकेसबभुलादूँगा
वोज़ेवरज़िस्मसेमेरेउतारेनाउतरताथा
  - Raj
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