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Kaviraj " Madhukar"
ki ab phir se KHataa ham kyuuñ karen
ki ab phir se KHataa ham kyuuñ karen | कि अब फिर से ख़ता हम क्यूँ करें
- Kaviraj " Madhukar"
कि
अब
फिर
से
ख़ता
हम
क्यूँ
करें
तेरी
चाहत
बता
हम
क्यूँ
करें
- Kaviraj " Madhukar"
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मिरी
आरज़ू
का
हासिल
तिरे
लब
की
मुस्कुराहट
हैं
क़ुबूल
मुझ
को
सब
ग़म
तिरी
इक
ख़ुशी
के
बदले
Kashif Adeeb Makanpuri
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल,
तो
जुस्तजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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सजा
है
प्रेम
का
उपवन
तुम्हीं
से
हमारी
चाह
है
पावन
तुम्हीं
से
सभी
में
प्रेम
देखें
प्रेम
चाहें
मिली
है
ये
मुझे
चितवन
तुम्हीं
से
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Vikas Sahaj
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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कभी
चाहत
पे
शक
करते
हुए
ये
भी
नहीं
सोचा
तुम्हारे
साथ
क्यूँ
रहते
अगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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ज़िंदगी
में
तब
से
चाहत
की
रही
नइँ
जुस्तुजू
जब
से
हमने
आपसे
पहली
दफ़ा
की
गुफ़्तगू
Bhawna Bhatt
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मुश्किल
उसका
दर्शन
है
अब
सो
फीका
सा
जीवन
है
अब
उसकी
ख़ातिर
ये
दिल
तो
क्या
इस
दिल
की
हर
धड़कन
है
अब
वो
भी
मुझको
चाहे
यारो
शायद
उसका
भी
मन
है
अब
जो
अच्छा
आशिक़
था
मेरा
वो
ही
अच्छा
दुश्मन
है
अब
सब
कुछ
पाकर
देखा
हमने
तुझको
पाने
का
मन
है
अब
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Kaviraj " Madhukar"
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हमें
था
पूछना
कैसे
गुज़ारा
कर
रही
हो
तुम
तुम्हारा
मन
नहीं
करता
हमें
मैसेज
करने
का
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समझो
मेरी
जान
बहुत
है
नफ़रत
से
नुक़सान
बहुत
है
जीना
मुश्किल
हो
सकता
है
मरना
तो
आसान
बहुत
है
तुम
जो
मेरी
ख़ातिर
करते
सच
में
मेरी
जान
बहुत
है
वो
ही
बेहद
मुश्किल
होता
लगता
जो
आसान
बहुत
है
शैतानी
दुनिया
की
ख़ातिर
हम
सेा
इक
इंसान
बहुत
है
हम
तो
अब
भी
सच
कहते
हैं
हम
में
अब
भी
जान
बहुत
है
मन
से
उसको
पढ़कर
देखो
वो
लड़की
आसान
बहुत
है
इस
में
कुछ
भी
ख़ास
नहीं
है
ये
दुनिया
बेजान
बहुत
है
जीना
सीखो
मेरेे
भाई
मरने
से
नुक़सान
बहुत
है
वो
तुमपे
मरती
है
मधुकर
जिस
सेे
तू
अंजान
बहुत
है
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Kaviraj " Madhukar"
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सच
है
वो
अंजान
नहीं
है
पर
वो
मेरी
जान
नहीं
है
तुम
जबसे
जग
में
आए
हो
तबसे
जग
वीरान
नहीं
है
उसके
बिन
हँसना
तो
छोडो़
रोना
भी
आसान
नहीं
है
जो
औरत
से
नफ़रत
करता
सच
में
वो
इंसान
नहीं
है
हम
है
तुमपर
मरने
वाले
तुमको
ये
भी
ध्यान
नहीं
है
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किसी
का
ख़याल
दिल
में
पल
चुका
है
दिया
था
इश्क़
का
जो
जल
चुका
है
तिरी
ख़ातिर
तिरा
हर
इक
दिवाना
मिरी
जाँ
आग
पर
भी
चल
चुका
है
हमारे
पास
तुम
जबतक
रहोगे
बुरा
सा
दौर
तब
तक
टल
चुका
है
किसी
भी
हाल
में
वो
जी
सकेगा
तिरे
ग़म
में
यहाँ
जो
पल
चुका
है
तुम्हीं
से
हो
गया
है
इश्क़
मुझको
तुम्हीं
में
दिल
मिरा
ये
ढ़ल
चुका
है
हुए
बर्बाद
हम
भी
इश्क़
में
ही
हमें
भी
इश्क़
यारो
ख़ल
चुका
है
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