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Ankit Raj
use choo kar khile hain so samajh lo
use choo kar khile hain so samajh lo | उसे छू कर खिले हैं सो समझ लो
- Ankit Raj
उसे
छू
कर
खिले
हैं
सो
समझ
लो
कभी
ये
फूल
मुरझाने
नहीं
हैं
- Ankit Raj
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हम
उनके
निकाले
हुए
लोगों
में
हैं
शामिल
हर
हाल
में
जीने
का
सलीक़ा
हमें
मालूम
वो
फूल
जो
तोड़े
गए
इज़हार
की
ख़ातिर
आते
हुए
किस
किस
ने
है
रौंदा
हमें
मालूम
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Amrendra Vishwakarma
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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जहाँ
पे
मैंने
तुझे
पहली
बार
देखा
था
वहाँ
पे
फूल
रखे
मैंने,
उम्र
भर
रक्खे
Aslam Rashid
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साँवले
तन
पे
ग़ज़ब
धज
है
बसंती
शाल
की
जी
में
है
कह
बैठिए
अब
जय
कनहय्या
लाल
की
Insha Allah Khan
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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तुमने
जो
फूल
लेते
में
छू
लीं
हैं
उंगलियाँ
मेरे
बदन
से
आएगी
ख़ुशबू
गुलाब
की
Siddharth Saaz
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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हमेशा
हाथों
में
होते
हैं
फूल
उनके
लिए
किसी
को
भेज
के
मँगवाने
थोड़ी
होते
हैं
Anwar Shaoor
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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पूछती
है
उदासी
लिपट
के
मुझे
मैं
तेरी
कौन
हूँ
तू
मिरा
कौन
है
Ankit Raj
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बस
कहानी
है
जन्नत
की
बातें
सभी
इस
जहाँ
में
जहाँ-शाद
कुछ
भी
नहीं
Ankit Raj
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तू
नहीं
तो
यहाँ
दूसरा
कौन
है
ख़्वाब
में
फिर
मुझे
छू
रहा
कौन
है
पूछती
है
उदासी
लिपट
के
मुझे
मैं
तेरी
कौन
हूँ
तू
मिरा
कौन
है
चाहता
भी
हूँ
मेरा
तमाशा
बने
देखना
है
मुझे
देखता
कौन
है
हाथ
ज़ब
छोड़ना
उनका
ये
सोचना
तेरा
दुनिया
में
उनके
सिवा
कौन
है
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Ankit Raj
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तुम
ने
इस
बात
का
पता
नहीं
है
इश्क़
का
कोई
दायरा
नहीं
है
दो
किनारे
हैं
इस
नदी
के
हम
और
किनारों
में
फ़ासला
नहीं
है
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Ankit Raj
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बहुत
कुछ
था
मगर
अब
कुछ
नहीं
है
अब
आए
हो
यहाँ
जब
कुछ
नहीं
है
Ankit Raj
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