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Ankit Raj
kahiin dariyaa banaate hain kahiin sehra banaate hain
kahiin dariyaa banaate hain kahiin sehra banaate hain | कहीं दरिया बनाते हैं कहीं सहरा बनाते हैं
- Ankit Raj
कहीं
दरिया
बनाते
हैं
कहीं
सहरा
बनाते
हैं
जहाँ
रस्ता
नहीं
होता
वहाँ
रस्ता
बनाते
हैं
- Ankit Raj
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
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धूप
के
एक
ही
मौसम
ने
जिन्हें
तोड़
दिया
इतने
नाज़ुक
भी
ये
रिश्ते
न
बनाये
होते
Waseem Barelvi
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मैं
आख़िर
कौन
सा
मौसम
तुम्हारे
नाम
कर
देता
यहाँ
हर
एक
मौसम
को
गुज़र
जाने
की
जल्दी
थी
Rahat Indori
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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नए
साल
में
पिछली
नफ़रत
भुला
दें
चलो
अपनी
दुनिया
को
जन्नत
बना
दें
Unknown
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नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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ग़ुंचा
ओ
गुल
माह
ओ
अंजुम
सब
के
सब
बेकार
थे
आप
क्या
आए
कि
फिर
मौसम
सुहाना
आ
गया
Asad Bhopali
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मैंने
जो
सब
सेे
छुपाया
है
कोई
देख
न
ले
अश्क
जो
आँखों
में
आया
है
कोई
देख
न
ले
Ankit Raj
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तुम्हारी
याद
से
निकली
उदासी
सभी
पहलू
से
है
अच्छी
उदासी
जहाँ
पहले
कभी
ख़ुशियाँ
रखी
थी
वहीं
पे
आज
है
रक्खी
उदासी
किसी
ने
दिल
के
अंदर
है
छिपाई
किसी
ने
चेहरे
पे
रक्खी
उदासी
उदासी
ने
भी
आख़िर
तंग
आ
कर
ये
मुझ
से
कह
दिया
इतनी
उदासी
जहाँ
में
सब
सेे
गहरा
है
समुंदर
समुंदर
से
भी
है
गहरी
उदासी
ख़ुशी
ने
पाँव
तक
समटे
हुए
हैं
बहुत
है
दूर
तक
फैली
उदासी
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Ankit Raj
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एक
दो
पल
तो
ज़रा
तुम
और
रुक
जाओ
ना
ऐसी
भी
जल्दी
भला
क्या
है
चले
जाना
तुम
Ankit Raj
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दिल
की
चौसर
ही
जीत
ली
उसने
दाँव
हर
कामयाब
है
उसका
Ankit Raj
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वहीं
पे
आ
गयें
है
फिर
जहाँ
से
दूर
जाना
था
Ankit Raj
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