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AMAN RAJ SINHA
maine bhi jab duniya ko uski nazar se dekha to
maine bhi jab duniya ko uski nazar se dekha to | मैंने भी जब दुनिया को उसकी नज़र से देखा तो
- AMAN RAJ SINHA
मैंने
भी
जब
दुनिया
को
उसकी
नज़र
से
देखा
तो
मुझको
भी
ये
दुनिया
अब
तो
बे-वफ़ा
ही
लगती
है
- AMAN RAJ SINHA
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तू
अपने
सारे
दुख
जाकर
बताता
है
जिन्हें,
इक
दिन
बढ़ाएँगे
वही
ग़म-ख़्वार
तेरी
आँख
का
पानी
Siddharth Saaz
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सौ
सौ
उमीदें
बँधती
है
इक
इक
निगाह
पर
मुझ
को
न
ऐसे
प्यार
से
देखा
करे
कोई
Allama Iqbal
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तुम्हारा
काम
इतना
है
कि
बस
काजल
लगा
लेना
तुम्हारी
आँख
की
ख़ातिर
नज़ारे
मैं
बनाऊँगा
Khalid Nadeem Shani
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मुझे
तो
उसका
भीतरी
ग़ुबार
है
निकालना
सो
आँख
चूमता
हूँ
उसके
होंठ
चूमता
नहीं
Siddharth Saaz
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भटकती
फिर
रही
है
आँख
घर
में
तिरी
आवाज़
इसको
दिख
रही
है
Himanshu Kiran Sharma
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इक
नज़र
उस
चेहरे
की
देखी
है
जब
से
यार
मुँह
उतरा
हुआ
है
रौशनी
का
Harsh saxena
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वो
मेरी
पीठ
में
ख़ंजर
ज़रूर
उतारेगा
मगर
निगाह
मिलेगी
तो
कैसे
मारेगा
Waseem Barelvi
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वफ़ा
नज़र
नहीं
आती
कहीं
ज़माने
में
वफ़ा
का
ज़िक्र
किताबों
में
देख
लेते
हैं
Hafeez Banarasi
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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चुराया
है
किसी
ने
मह-जबीं
मुझ
सेे
'इशा
ने
रौशनी
को
हर
लिया
जैसे
AMAN RAJ SINHA
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कहो
मुझ
सेे
बिछड़
कर
भूल
जाओगी
बताओ
भूल
कर
के
क्या
जी
पाओगी
है
इक
दिन
में
तुम्हारी
तो
ये
हालत
सो
बिछड़
कर
तो
यक़ीनन
मर
ही
जाओगी
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AMAN RAJ SINHA
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तुमको
ये
लग
रहा
है
कि
दीवानगी
है
दोस्त
मेरी
ग़ज़ल
नहीं
है
मेरी
ज़िंदगी
है
दोस्त
गिर
जो
गया
नज़र
से
तू
हैरत
नहीं
मुझे
अपना
भी
तू
रहा
नहीं
शर्मिंदगी
है
दोस्त
कहता
था
जो
कभी
मुझे
बदलूँगा
मैं
नहीं
अब
तो
वो
भी
बदल
गया
हैरानगी
है
दोस्त
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AMAN RAJ SINHA
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तुम्हारे
बाद
कोई
है
हमारा
नइँ
हमारा
तो
तुम्हारे
बिन
गुज़ारा
नइँ
अगर
सोचो
मेरे
तुम
जो
न
होते
तो
है
इस
बहती
नदी
का
तो
किनारा
नइँ
किया
अच्छा
भँवर
को
थाम
कर
तुमने
पता
है
अब
कि
कोई
भी
सहारा
नइँ
उड़ा
ये
सोच
कर
ही
घर
को
लौटूँगा
मगर
अब
तो
परिंदे
का
गुज़ारा
नइँ
सुना
था
ये
बिछड़
कर
मौत
आती
है
मुझे
पल
भर
भी
जीना
अब
गवारा
नइँ
वफ़ा
कर
जो
सज़ा
हमको
मिली
है
ये
उसे
दिल
से
अभी
तक
है
उतारा
नइँ
सितारे
आसमाँ
में
अब
भी
हैं
मौजूद
मगर
उन
में
हमारा
अब
सितारा
नइँ
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AMAN RAJ SINHA
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जो
देखते
थे
दुनिया
मेरी
आँखों
से
कभी
ऑंखें
वही
दिखा
रहे
हैं
मुझ
को
आजकल
AMAN RAJ SINHA
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