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AMAN RAJ SINHA
phir muhabbat karne ki jab sochi maine
phir muhabbat karne ki jab sochi maine | फिर मुहब्बत करने की जब सोची मैंने
- AMAN RAJ SINHA
फिर
मुहब्बत
करने
की
जब
सोची
मैंने
यार
फिर
हिजरत
की
आई
याद
मुझको
- AMAN RAJ SINHA
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बिछड़
गया
हूँ
मगर
याद
करता
रहता
हूँ
किताब
छोड़
चुका
हूँ
पढ़ाई
जारी
है
Ali Zaryoun
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बस
ये
दिक़्क़त
है
भुलाने
में
उसे
उसके
बदले
में
किस
को
याद
करें
Fahmi Badayuni
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वो
किसी
को
याद
कर
के
मुस्कुराया
था
उधर
और
मैं
नादान
ये
समझा
कि
वो
मेरा
हुआ
Iqbal Ashhar
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अब
उस
के
दर
से
भी
आवाज़
आती
है
कि
नहीं
बता
रे
ज़िन्दगी
तू
बाज़
आती
है
कि
नहीं
बहकने
लगता
है
जब
जब
किसी
के
प्यार
में
दिल
तो
तेरी
याद
यूँंँ
आके
डराती
है
कि
नहीं
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Faiz Ahmad
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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आख़िरी
बार
मैं
कब
उस
से
मिला
याद
नहीं
बस
यही
याद
है
इक
शाम
बहुत
भारी
थी
Hammad Niyazi
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जन्मदिन
पर
भी
मुझे
वो
याद
अब
करता
नहीं
इस
ज़माने
में
कोई
इतना
भी
मुफ़्लिस
होगा
क्या
Harsh saxena
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ये
कहन
का
जो
तरीक़ा
है
लुभाता
क्या
करें
तेरे
होंठों
का
जो
सरगम
है
बुलाता
क्या
करें
हुस्न
जो
तेरा
है
जाने
क्या
क़यामत
है
भला
तेरी
आँखों
का
समुंदर
है
डुबाता
क्या
करें
ज़ुल्फ़ें
ये
बिखरी
हुई
है
जो
सुनहरी
शाम
सी
उस
में
दिल
जो
ये
शरारत
है
कराता
क्या
करें
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AMAN RAJ SINHA
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जो
देखते
थे
दुनिया
मेरी
आँखों
से
कभी
ऑंखें
वही
दिखा
रहे
हैं
मुझ
को
आजकल
AMAN RAJ SINHA
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चुराया
है
किसी
ने
मह-जबीं
मुझ
सेे
'इशा
ने
रौशनी
को
हर
लिया
जैसे
AMAN RAJ SINHA
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तुमको
ये
लग
रहा
है
कि
दीवानगी
है
दोस्त
मेरी
ग़ज़ल
नहीं
है
मेरी
ज़िंदगी
है
दोस्त
गिर
जो
गया
नज़र
से
तू
हैरत
नहीं
मुझे
अपना
भी
तू
रहा
नहीं
शर्मिंदगी
है
दोस्त
कहता
था
जो
कभी
मुझे
बदलूँगा
मैं
नहीं
अब
तो
वो
भी
बदल
गया
हैरानगी
है
दोस्त
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AMAN RAJ SINHA
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तुम्हारे
बाद
कोई
है
हमारा
नइँ
हमारा
तो
तुम्हारे
बिन
गुज़ारा
नइँ
अगर
सोचो
मेरे
तुम
जो
न
होते
तो
है
इस
बहती
नदी
का
तो
किनारा
नइँ
किया
अच्छा
भँवर
को
थाम
कर
तुमने
पता
है
अब
कि
कोई
भी
सहारा
नइँ
उड़ा
ये
सोच
कर
ही
घर
को
लौटूँगा
मगर
अब
तो
परिंदे
का
गुज़ारा
नइँ
सुना
था
ये
बिछड़
कर
मौत
आती
है
मुझे
पल
भर
भी
जीना
अब
गवारा
नइँ
वफ़ा
कर
जो
सज़ा
हमको
मिली
है
ये
उसे
दिल
से
अभी
तक
है
उतारा
नइँ
सितारे
आसमाँ
में
अब
भी
हैं
मौजूद
मगर
उन
में
हमारा
अब
सितारा
नइँ
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AMAN RAJ SINHA
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