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Pushkar Tripathi
itnaa badaa sansaar hai phir bhi mujhe
itnaa badaa sansaar hai phir bhi mujhe | इतना बड़ा संसार है फिर भी मुझे
- Pushkar Tripathi
इतना
बड़ा
संसार
है
फिर
भी
मुझे
चाहत
हुई
उस
ही
की
जो
मेरा
नहीं
- Pushkar Tripathi
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कभी
चाहत
पे
शक
करते
हुए
ये
भी
नहीं
सोचा
तुम्हारे
साथ
क्यूँ
रहते
अगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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इतना
ऊँचा
उड़ना
भी
कुछ
ठीक
नहीं
पाबंदी
लग
जाती
है
परवाज़ों
पर
तुझको
छू
कर
और
किसी
की
चाह
रखे
हैरत
है
और
लानत
है
ऐसे
हाथों
पर
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Varun Anand
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उसकी
चाहत
में
भी
इख़लास
नहीं
था
शायद
और
कुछ
हम
भी
उसे
दिल
से
नहीं
चाह
सके
Salman ashhadi sahil
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ज़िंदगी
में
तब
से
चाहत
की
रही
नइँ
जुस्तुजू
जब
से
हमने
आपसे
पहली
दफ़ा
की
गुफ़्तगू
Bhawna Bhatt
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हम
चाह
कर
भी
टूटते
हैं
हर
दफ़ा
होता
यही
है
इश्क़
का
क्या
क़ायदा
हर
वक़्त
तुम
यूँँ
याद
आते
हो
मुझे
जैसे
नई
दुल्हन
करे
मिस
मायका
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Harsh saxena
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इस
कमरे
में
लाश
पड़ी
है
चाहत
की
और
यहाँ
इक
याद
भटकती
रहती
है
Shivam Tiwari
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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काम
के
बोझ
तले
दब
गए
तो
समझे
हम
लोग
क्यूँँ
चाह
के
भी
दिल
का
नहीं
कर
पाते
Jangveer Singh Rakesh
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भटकती
रूहों
का
बोझ
कब
तक
कोई
उठाता
कहीं
ठहरता,पनाह
लेता,
तो
साथ
होता
मैं
जिस
'अक़ीदत
के
साथ
उसको
भुला
रहा
हूँ
उसी
'अक़ीदत
से
चाह
लेता,
तो
साथ
होता
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Armaan khan
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ख़ुद
से
भी
मिल
न
सको,
इतने
पास
मत
होना
इश्क़
तो
करना,
मगर
देवदास
मत
होना
देखना,
चाहना,
फिर
माँगना,
या
खो
देना
ये
सारे
खेल
हैं,
इन
में
उदास
मत
होना
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Kumar Vishwas
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मैं
जा
चुका
हूँ
लौट
अब
सकता
नहीं
क्यूँ
देर
कर
दी
तुमने
आने
में
भला
Pushkar Tripathi
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जब
मर
गए
सब
ख़्वाब
तब
घर
आई
है
क्या
करने
को
उम्मीद
अब
बर
आई
है
Pushkar Tripathi
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अब
छोड़
कर
तन्हा
मुझे
मसरूफ़
है
वो
भी
कहीं
उसके
लिए
भी
मैं
फ़क़त
तदबीर
था
तन्हाई
का
Pushkar Tripathi
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पहले
ख़यालों
को
उतारा
पन्ने
पर
मैंने
मगर
फिर
उसपे
स्याही
फेंक
दी
Pushkar Tripathi
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ये
ज़िन्दगी
जब
भटका
जाती
है
मुझे
तब
मौत
ही
रस्ता
दिखाती
है
मुझे
जब
ग़म
मिरा
सोने
नहीं
देता
कभी
तेरी
ख़ुशी
जानाँ
सुलाती
है
मुझे
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Pushkar Tripathi
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