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Priyanshu Tiwari
saath lashkar banaa ke dekhenge
saath lashkar banaa ke dekhenge | साथ लश्कर बना के देखेंगे
- Priyanshu Tiwari
साथ
लश्कर
बना
के
देखेंगे
ये
भी
मंज़र
बना
के
देखेंगे
अब
तलक
मोम
थे
मोहब्बत
में
ख़ुद
को
पत्थर
बना
के
देखेंगे
- Priyanshu Tiwari
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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सब
यार
सोचते
थे
रहेगा
वही
समाँ
इक
मैं
ही
बस
बचा
हूँ
कोई
सौ
पचास
में
Amaan Pathan
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नई
नई
आँखें
हों
तो
हर
मंज़र
अच्छा
लगता
है
कुछ
दिन
शहर
में
घू
में
लेकिन
अब
घर
अच्छा
लगता
है
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Nida Fazli
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ग़ज़ल
बनकर
मेरे
दिल
में
समा
जा
मैं
तुझको
गुनगुनाना
चाहता
हूँ
D Faiz Khan
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जिस
शाने
पर
सर
रखते
हो
उस
शाने
पर
सो
जाते
हो
जाने
कैसे
दीदावर
हो
हर
मंज़र
में
खो
जाते
हो
Poonam Yadav
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खिला
कर
भंग
की
गुजिया
समा
रंगीन
कर
दो
तुम
बड़ी
मुश्क़िल
से
तो
हो
पाया
है
दीदार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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थोड़ा
सा
अक्स
चाँद
के
पैकर
में
डाल
दे
तू
आ
के
जान
रात
के
मंज़र
में
डाल
दे
Kaif Bhopali
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और
भी
दुनिया
में
मंज़र
ख़ूब-सूरत
हैं
मगर
तेरी
ज़ुल्फ़ों
झटकने
से
सुहाना
कुछ
नहीं
Alankrat Srivastava
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पस-मंज़र
में
'फ़ीड'
हुए
जाते
हैं
इंसानी
किरदार
फ़ोकस
में
रफ़्ता
रफ़्ता
शैतान
उभरता
आता
है
Abdul Ahad Saaz
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ख़्वाब
अपने
सभी
अब
सजा
लीजिये
दिल
कहीं
और
अपना
लगा
लीजिये
बैठते
वक़्त
डोली
में
उसने
कहा
आप
भी
अपनी
दुनिया
बसा
लीजिये
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Priyanshu Tiwari
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भँवर
से
कैसे
बच
पाया
किसी
पतवार
से
पूछो
हमारा
हौसला
पूछो,
तो
फिर
मझधार
से
पूछो
Priyanshu Tiwari
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मुहब्बत
की
लड़ाई
में
कभी
भी
सर
नहीं
जाता
मगर
ता-उम्र
इस
दिल
से
इसी
का
डर
नहीं
जाता
यही
तो
सोचकर
के
बस
अभी
तक
जी
रहा
हूँ
मैं
किसी
की
बे-वफ़ाई
से
कोई
भी
मर
नहीं
जाता
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Priyanshu Tiwari
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आस
टूटी
मगर
मुस्कुराते
रहे
सांस
छूटी
मगर
मुस्कुराते
रहे
तुम
भी
रोने
लगोगी
यही
सोचकर
रेल
छूटी
मगर
मुस्कुराते
रहे
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Priyanshu Tiwari
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की
मैंने
सब
सेे
दोस्ती
अपने
हिसाब
से
जी
मैंने
अपनी
ज़िंदगी
अपने
हिसाब
से
हम
सारी
उम्र
मस्जिद-ओ-मंदिर
नहीं
गए
की
है
ख़ुदा
की
बन्दगी
अपने
हिसाब
से
हर
बार
मुस्कुरा
के
उसे
माफ़
कर
दिया
हम
ने
जताई
दुश्मनी
अपने
हिसाब
से
अख़बार
से
न
कोई
न
ही
इश्तिहार
से
हमनें
मिटाई
तीरगी
अपने
हिसाब
से
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Priyanshu Tiwari
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