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Priyanshu Tiwari
kabhi sheesha kabhi kanghi kabhi chaddar badalna tha
kabhi sheesha kabhi kanghi kabhi chaddar badalna tha | कभी शीशा, कभी कंघी, कभी चद्दर बदलना था
- Priyanshu Tiwari
कभी
शीशा,
कभी
कंघी,
कभी
चद्दर
बदलना
था
रहे
थे
साथ
जिन
में
भी
वो
सब
मंज़र
बदलना
था
तुम्हारे
बाद
में
हमनें
यहाँ
क्या-क्या
नहीं
बदला
तुम्हारा
क्या
था
तुमको
तो
महज
नंबर
बदलना
था
- Priyanshu Tiwari
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याद
आई
जब
मुझे
'फ़रहत'
से
छोटी
थी
बहन
मेरे
दुश्मन
की
बहन
ने
मुझ
को
राखी
बाँध
दी
Ehsan Saqib
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शिकस्ता
नाव
समझ
कर
डुबोने
वाले
लोग
न
पा
सके
मुझे
साहिल
पे
खोने
वाले
लोग
ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
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Kashif Sayyed
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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बैठे
बिठाए
हम
को
सनम
याद
आ
गए
फिर
उन
के
साथ
उन
के
करम
याद
आ
गए
कोई
जो
राह
चलते
अचानक
मिला
मियाँ
हम
को
हर
एक
रंज-ओ-अलम
याद
आ
गए
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shaan manral
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रंग
बदला
यार
ने
वो
प्यार
की
बातें
गईं
वो
मुलाक़ातें
गईं
वो
चाँदनी
रातें
गईं
Hafeez Jalandhari
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तेरा
बनता
था
कि
तू
दुश्मन
हो
अपने
हाथों
से
खिलाया
था
तुझे
तेरी
गाली
से
मुझे
याद
आया
कितने
तानों
से
बचाया
था
तुझे
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Ali Zaryoun
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ख़ामुशी
से
हुई
फ़ुग़ाँ
से
हुई
इब्तिदा
रंज
की
कहाँ
से
हुई
Ada Jafarey
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इसलिए
लड़ता
है
मुझ
सेे
मेरा
दुश्मन
उसका
भी
मेरे
सिवा
कोई
नहीं
है
Aves Sayyad
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आप
बच्चों
का
दिल
नहीं
तोड़ें
भाई
ये
दुश्मनी
हमारी
है
Vishnu virat
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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साथ
लश्कर
बना
के
देखेंगे
ये
भी
मंज़र
बना
के
देखेंगे
अब
तलक
मोम
थे
मोहब्बत
में
ख़ुद
को
पत्थर
बना
के
देखेंगे
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Priyanshu Tiwari
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आस
टूटी
मगर
मुस्कुराते
रहे
सांस
छूटी
मगर
मुस्कुराते
रहे
तुम
भी
रोने
लगोगी
यही
सोचकर
रेल
छूटी
मगर
मुस्कुराते
रहे
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Priyanshu Tiwari
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ख़्वाब
अपने
सभी
अब
सजा
लीजिये
दिल
कहीं
और
अपना
लगा
लीजिये
बैठते
वक़्त
डोली
में
उसने
कहा
आप
भी
अपनी
दुनिया
बसा
लीजिये
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Priyanshu Tiwari
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मुहब्बत
की
लड़ाई
में
कभी
भी
सर
नहीं
जाता
मगर
ता-उम्र
इस
दिल
से
इसी
का
डर
नहीं
जाता
यही
तो
सोचकर
के
बस
अभी
तक
जी
रहा
हूँ
मैं
किसी
की
बे-वफ़ाई
से
कोई
भी
मर
नहीं
जाता
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Priyanshu Tiwari
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की
मैंने
सब
सेे
दोस्ती
अपने
हिसाब
से
जी
मैंने
अपनी
ज़िंदगी
अपने
हिसाब
से
हम
सारी
उम्र
मस्जिद-ओ-मंदिर
नहीं
गए
की
है
ख़ुदा
की
बन्दगी
अपने
हिसाब
से
हर
बार
मुस्कुरा
के
उसे
माफ़
कर
दिया
हम
ने
जताई
दुश्मनी
अपने
हिसाब
से
अख़बार
से
न
कोई
न
ही
इश्तिहार
से
हमनें
मिटाई
तीरगी
अपने
हिसाब
से
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Priyanshu Tiwari
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