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Prit
mujhse pahle kisi se mili aati hai
mujhse pahle kisi se mili aati hai | मुझ सेे पहले किसी से मिली आती है
- Prit
मुझ
सेे
पहले
किसी
से
मिली
आती
है
वस्ल
में
हिज्र
की
ख़ुश्बू
सी
आती
है
मैं
बिछड़
कर
दुखी
हूँ
तू
ऐसा
न
सोच
ऐसे
मौसम
में
तो
शा'इरी
आती
है
- Prit
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यार
ने
हम
से
बे-अदाई
की
वस्ल
की
रात
में
लड़ाई
की
Meer Taqi Meer
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तुम
ने
भी
उन
से
ही
मिलना
होता
है
जिन
लोगों
से
मेरा
झगड़ा
होता
है
तुम
मेरी
दुनिया
में
बिल्कुल
ऐसे
हो
ताश
में
जैसे
हुकुम
का
इक्का
होता
है
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Zia Mazkoor
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मर्म
हँसने
का
समझ
पाए
ज़रा
हम
देर
से
वस्ल
जिसको
कह
रहे
थे
हिज्र
की
बुनियाद
थी
Atul K Rai
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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इस
क़दर
था
खटमलों
का
चारपाई
में
हुजूम
वस्ल
का
दिल
से
मिरे
अरमान
रुख़्सत
हो
गया
Akbar Allahabadi
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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मैं
इसलिए
भी
तिरे
वस्ल
से
झिझकता
हूँ
कहीं
फिर
इश्क़
मेरा
रायगाँ
न
हो
जाए
Wajid Husain Sahil
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आप
तो
मुँह
फेर
कर
कहते
हैं
आने
के
लिए
वस्ल
का
वा'दा
ज़रा
आँखें
मिला
कर
कीजिए
Lala Madhav Ram Jauhar
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उस
से
मिलना
तो
उसे
ईद-मुबारक
कहना
ये
भी
कहना
कि
मिरी
ईद
मुबारक
कर
दे
Dilawar Ali Aazar
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ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
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आज
कल
मुझ
सेे
तुम
रूठती
भी
नहीं
बात
क्या
है
जाँ,
किस
बात
पे
रूठी
हो
Prit
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उसके
दिल
में
नाम
अपना
ढूँढता
हूँ
यानी
मैं
सहरा
में
दरिया
ढूँढता
हूँ
Prit
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तल्ख़
मौसम
में
मीठी
बातें
कर
चाय
में
जैसे
चीनी
बातें
कर
टूटने
को
है
सच्चा
इश्क़
अपना
जोड़े
रखने
को
झूठी
बातें
कर
आज
कल
मन
उदास
रहता
है
थोड़े
दिन
तक
हवस
की
बातें
कर
मुझको
दुनिया
से
कोई
मतलब
नइँ
मेरे
महबूब
ख़ुद
की
बातें
कर
गुफ़्तुगू
अपनी
सुनने
वालों
को
शर्म
आ
जाए
वैसी
बातें
कर
ग़ज़लें
लिख
कर
रिझाना
है
तुझको
रूठ
जा
मुझ
सेे
कड़वी
बातें
कर
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Prit
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ज़ेर-ए-साया-ए–ज़ुल्फ,
सोचा
नहीं
तेरी
फुर्कत
भी
सहनी
पड़ेगी
हमें
Prit
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इश्क़
उस
वक़्त
बाज़ी
जीत
गया
हार
का
हार
पहना
जब
दिल
ने
Prit
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