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Prit
buzurgon se viraasat men mile dard-o-alam hamko
buzurgon se viraasat men mile dard-o-alam hamko | बुज़ुर्गों से विरासत में मिले दर्द-ओ-अलम हमको
- Prit
बुज़ुर्गों
से
विरासत
में
मिले
दर्द-ओ-अलम
हमको
बुज़ुर्गों
की
बड़ी
जागीर
थी
जागीर
में
ग़म
थे
- Prit
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सर-ज़मीन-ए-हिंद
पर
अक़्वाम-ए-आलम
के
'फ़िराक़'
क़ाफ़िले
बसते
गए
हिन्दोस्ताँ
बनता
गया
Firaq Gorakhpuri
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तुझे
छूकर
अभी
तक
होश
में
हूँ
कमी
कोई
कहीं
तो
रह
गई
है
Abhay Mishra
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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दुनिया
के
ताने
सह
लेता
हूँ
इक
अच्छा
बेटा
कहलाना
है
Neeraj Neer
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तुम
भी
लिखना
तुम
ने
उस
शब
कितनी
बार
पिया
पानी
तुम
ने
भी
तो
छज्जे
ऊपर
देखा
होगा
पूरा
चाँद
Nida Fazli
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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ये
काम
दोनों
तरफ़
हुआ
है
उसे
भी
आदत
पड़ी
है
मेरी
Shariq Kaifi
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अपना
किरदार
काम
आया
नहीं
बदचलन
नौकरी
जो
करता
था
Prit
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आज
कल
आइने
में
देखना
ही
छोड़
दिया
मेरी
सूरत
में
तेरा
अक्स
नज़र
आता
है
Prit
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जब
तू
मुझे
मिलने
आया
ही
नहीं
तो
फिर
ये
तेरे
गले
के
नीचे
होंटों
के
निशाँ
कैसे?
Prit
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वो
कभी
मेरा
हो
नहीं
सकता,
मैं
उसे
भूल
भी
नहीं
सकता
ये
मेरे
दिल
पे
क्या
मुसीबत
है,
इस
तरफ़
खाई,
उस
तरफ़
कुआँ
है
Prit
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तल्ख़
मौसम
में
मीठी
बातें
कर
चाय
में
जैसे
चीनी
बातें
कर
टूटने
को
है
सच्चा
इश्क़
अपना
जोड़े
रखने
को
झूठी
बातें
कर
आज
कल
मन
उदास
रहता
है
थोड़े
दिन
तक
हवस
की
बातें
कर
मुझको
दुनिया
से
कोई
मतलब
नइँ
मेरे
महबूब
ख़ुद
की
बातें
कर
गुफ़्तुगू
अपनी
सुनने
वालों
को
शर्म
आ
जाए
वैसी
बातें
कर
ग़ज़लें
लिख
कर
रिझाना
है
तुझको
रूठ
जा
मुझ
सेे
कड़वी
बातें
कर
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Prit
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