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Naresh sogarwal 'premi'
tu milne se har baar mukra karegi
tu milne se har baar mukra karegi | तू मिलने से हर बार मुकरा करेगी
- Naresh sogarwal 'premi'
तू
मिलने
से
हर
बार
मुकरा
करेगी
मिरी
ईद
अब
यूँँ
ही
गुजरा
करेगी
- Naresh sogarwal 'premi'
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वो
चाँद
कह
के
गया
था
कि
आज
निकलेगा
तो
इंतिज़ार
में
बैठा
हुआ
हूँ
शाम
से
मैं
Farhat Ehsaas
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उस
के
चेहरे
की
चमक
के
सामने
सादा
लगा
आसमाँ
पे
चाँद
पूरा
था
मगर
आधा
लगा
Iftikhar Naseem
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अमीर-ए-शहर
का
रिश्ते
में
कोई
कुछ
नहीं
लगता
ग़रीबी
चाँद
को
भी
अपना
मामा
मान
लेती
है
Munawwar Rana
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सूरज
सितारे
चाँद
मेरे
साथ
में
रहे
जब
तक
तुम्हारे
हाथ
मेरे
हाथ
में
रहे
Rahat Indori
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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यही
है
ज़िंदगी
कुछ
ख़्वाब
चंद
उम्मीदें
इन्हीं
खिलौनों
से
तुम
भी
बहल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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चाँद
का
फिर
मेरा
रस्ता
देखती
आँखें
तुम्हारी
आज
करवाचौथ
के
दिन
काश
हम
तुम
साथ
होते
Gaurav Singh
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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चंद
ख़्वाबों
की
हाथा-पाई
में
नींद
कल
गिर
गई
थी
बिस्तर
से
Shiva awasthi
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वस्ल
तेरा
मुख़्तसर
तिरा
फ़िराक़
उम्र
भर
जान
तुझको
भूलें
और
तुझको
याद
भी
करें
Naresh sogarwal 'premi'
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मिलता
भी
नहीं
यूँँ
कोई
कहने
से
भी
हम
मिले
इस
ख़ुदा
की
साज़िशी
का
कुछ
तू
भी
ख़्याल
कर
Naresh sogarwal 'premi'
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देखूँ
जाँ
बे-दिली
बे-दिली
है
मेरी
अब
तो
यही
ज़िन्दगी
है
जिस
मकाँ
रहते
जम
जाए
जो
धूल
ला-मकाँ
स्त्री
की
कमी
है
आज
फिर
ग़म
नहीं
खुल
भी
पाया
आज
फिर
इक
नई
बेबसी
है
दिल
नई
याद
में
जाता
है
डूब
रोज़
फिर
इक
नई
सी
कमी
है
जुज़
जिसे
कर
नहीं
पाया
कामिल
ये
नज़र
जाँ
थी
वाँ
ही
थमी
है
आह
गोशा-ए-तन्हाई
में
भी
बे-सर-ओ-पा
के
ये
बेख़ुदी
है
नाला
होने
को
कब
से
हूँ
आतुर
अश्क-ए-ग़म
मुझ
सेे
क्यूँँ
बरहमी
है
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Naresh sogarwal 'premi'
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ये
ज़रा
बता
दो
तुम
यूँँ
बिछड़ने
से
पहले
क्या
करें
वो
जो
तुमको
भूल
भी
नहीं
सकते
Naresh sogarwal 'premi'
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यही
था
हक़
तिरा
क्या
वो
यही
मुहब्बत
थी
मना
किया
था
तुझे
और
तू
ये
मान
गई
Naresh sogarwal 'premi'
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