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Naresh sogarwal 'premi'
meri subah aur raat ka vivaad to ye hai
meri subah aur raat ka vivaad to ye hai | मेरी सुब्ह और रात का विवाद तो ये है
- Naresh sogarwal 'premi'
मेरी
सुब्ह
और
रात
का
विवाद
तो
ये
है
मुझ
को
लगती
है
सिगार
सोने
और
जगने
में
- Naresh sogarwal 'premi'
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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रात
भर
ता'रीफ़
मैंने
की
तुम्हारे
रूप
की
चाँद
इतना
जल
गया
सुनकर
कि
सूरज
हो
गया
Chandan Rai
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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तन्हाई
के
हुजूम
में
वो
एक
तेरी
याद
जैसे
अँधेरी
रात
में
जलता
हुआ
दिया
Sagheer Lucky
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जैसे
देखा
हो
आख़िरी
सपना
रात
इतनी
उदास
थीं
आँखें
Siraj Faisal Khan
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उस
के
ख़त
रात
भर
यूँँ
पढ़ता
हूँ
जैसे
कल
इम्तिहान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
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सारी
रात
लगाकर
उसपर
नज़्म
लिखी
और
उसने
बस
अच्छा
लिखकर
भेजा
है
Zahid Bashir
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मैं
न
सोया
रात
सारी
तुम
कहो
बिन
मेरे
कैसे
गुज़ारी,
तुम
कहो
हिज्र,
आँसू,
दर्द,
आहें,
शा'इरी
ये
तो
बातें
थीं
हमारी,
तुम
कहो
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Prakhar Kanha
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हम
जिएँगे
इसी
गुमानी
में
मैं
हूँ
किरदार
इक
कहानी
में
भाप
बादल
से
फिर
बरसती
है
खोऊँ
भी
क्या
मैं
राएगानी
में
रोक
सकता
नहीं
ज़ियादा
देर
वायु
को
बुलबुला
भी
पानी
में
होंट
भी
स्याह
और
ये
दाढ़ी
चाँदी
सी
हो
गई
जवानी
में
रोज़
हो
जाता
हूँ
धुआँ
धुआँ
मैं
आतिश-ए-दिल
की
इस
रवानी
में
चैन
की
कोई
चीज़
बख़्शी
नहीं
वहशत-ए-हिज्र
इश्क़-ए-फ़ानी
में
सारे
क़िरदार
हो
गए
क़ुदसी
अब
बचा
क्या
है
इस
कहानी
में
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Naresh sogarwal 'premi'
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इतना
तन्हा
हूँ
मैं
इतना
तन्हा
हूँ
अब
ज़रा
सी
भी
तसल्ली
नइँ
मुझे
Naresh sogarwal 'premi'
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ऐ
सनम
हमारे
तो
बड़े
नसीब
हैं
ख़राब
इत्तिफ़ाक़
में
ये
लड़का
ग़मज़दा
मिला
तुम्हें
Naresh sogarwal 'premi'
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मिल
नहीं
पाया
तो
बीमार
रहा
चाहत
में
मेरा
इक
शख़्स
तलबगार
रहा
चाहत
में
टूटते
ही
किसी
का
बस
गया
घर
मेरी
तरह
उम्र-भर
कोई
यूँँ
बेज़ार
रहा
चाहत
में
मेरी
चाहत
भी
किसी
काम
नहीं
आई
पर
इस
ग़म-ए-हिज्र
का
तेहवार
रहा
चाहत
में
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Naresh sogarwal 'premi'
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कटती
नहीं
है
बे-कली
मेरी
शफ़ीक़
जब
तक
कि
ख़ुद
पर
तंज़
कस
लेता
नहीं
Naresh sogarwal 'premi'
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