hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Naresh sogarwal 'premi'
ek soorat bholi bhaali haaye haaye
ek soorat bholi bhaali haaye haaye | एक सूरत भोली भाली हाए हाए
- Naresh sogarwal 'premi'
एक
सूरत
भोली
भाली
हाए
हाए
वो
हँसी
जाँ
लेने
वाली
हाए
हाए
छिन
गई
मुस्कान
मेरे
चेहरे
की
बुझ
गई
होंठों
की
लाली
हाए
हाए
कह
रहे
हैं
जिस्म
का
क्या
कर
लिया
क्या
हुई
तेरी
जमाली
हाए
हाए
पड़
गए
बीमार
तेरी
याद
में
गुज़री
थी
ऐसी
दिवाली
हाए
हाए
मिल
गई
या-रब
जुदाई
एक
और
कैसी
क़िस्मत
लिख
ये
डाली
हाए
हाए
- Naresh sogarwal 'premi'
Download Ghazal Image
आँख
में
अश्क
भी
बचाना
है
रोना
है
ख़ुद
को
ही
सताना
है
ख़ुद
को
इतना
भी
तो
बचाना
है
हिज्र
को
हँसना
भी
सिखाना
है
रोना
नइँ
है
किसी
के
भी
आगे
ग़म
तुझे
इतना
भी
बुझाना
है
दिन
को
वो
रोज़
डूब
जाता
है
चाँद
को
बे-अजल
बुलाना
है
पैसे
का
स्रोत
गर
मुझे
हो
जाए
हिज्र
को
ठीक
से
मनाना
है
हो
मुलाक़ात
गर
कभी
उस
सेे
जिस्म
ज़ख़्मों
का
ये
दिखाना
है
गोया
मैं
रोज़
मर
सा
जाता
हूँ
किसी
दिन
मर
के
भी
दिखाना
है
Read Full
Naresh sogarwal 'premi'
Download Image
1 Like
तुम
आना
जब
मिरे
दिन
अच्छे
हों
मता-ए-जाँ
बुरा
है
वक़्त
अभी
और
अच्छे
दिन
नहीं
मालूम
Naresh sogarwal 'premi'
Send
Download Image
2 Likes
कभी
तो
पूछ
लीजे
हाल
मिरा
ख़ुद
को
बीमार
मैं
रखूँ
कब
तक
Naresh sogarwal 'premi'
Send
Download Image
1 Like
लोग
क्यूँँ
सिगरेट
के
पीने
से
जाहिल
कहते
हैं
क्या
ज़रा
से
इस
धुएँ
में
ज़र्फ़
मेरा
उड़
गया
Naresh sogarwal 'premi'
Send
Download Image
1 Like
माँ
तो
हर
इक
विषयों
का
चर्चा
होता
है
घर
का
पिता
इक
एक
पुर्ज़ा
होता
है
वालिद
का
साया
घर
से
गर
उठ
जाए
तो
बहनों
को
भाई
बाप
दर्जा
होता
है
इंसान
की
मजबूरी
देखी
नइँ
तू
ने
तंगी
में
इक
पाई
पे
चर्चा
होता
है
आसाँ
नहीं
पढ़ना
बिना
पैसों
के
भी
आने
व
जाने
में
भी
ख़र्चा
होता
है
Read Full
Naresh sogarwal 'premi'
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Ibaadat Shayari
Satire Shayari
Kitaaben Shayari
Sarhad Shayari
Aadmi Shayari