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Prashant Sitapuri
tanhaaii men mehfil hota hooñ
tanhaaii men mehfil hota hooñ | तन्हाई में महफिल होता हूँ
- Prashant Sitapuri
तन्हाई
में
महफिल
होता
हूँ
पर
भीड़
अकेला
कर
देती
है
- Prashant Sitapuri
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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सभी
के
साथ
दिखना
भी
मगर
सब
सेे
जुदा
रहना
भी
है
उसको
उदासी
साथ
भी
रखनी
है
और
तस्वीर
में
हँसना
भी
है
उसको
Kafeel Rana
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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कोई
हादसा
लेकर
आदमी
किधर
जाए
आदमी
अगर
कह
दे
हादसा
उदासी
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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हँसते
हँसते
निकल
पड़े
आँसू
रोते
रोते
कभी
हँसी
आई
Anwar Taban
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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पहले
ये
काम
बड़े
प्यार
से
माँ
करती
थी
अब
हमें
धूप
जगाती
है
तो
दुख
होता
है
Munawwar Rana
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हुनर
समझो
या
कोई
ऐब
समझो
इसको
के
जाँ
हम
हो
चाहें
ख़ाक
हासिल
फिर
भी
पुर-उम्मीद
रहते
हैं
Prashant Sitapuri
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माँ
जब
बीमार
होती
है
कहीं
भी
जी
नहीं
लगता
माँ
के
बीमार
होने
पर
वही
घर
काटता
मुझको
Prashant Sitapuri
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जिसके
लिए
थे
कर
रहे
शादी
की
बात
घर
उसने
कहा
कि
तुमपे
भरोसा
नहीं
रहा
Prashant Sitapuri
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अदब
ही
सीखते
हैं
हम
अदब
ही
काम
आएगा
दु'आ
जब
माँ
करेगी
तो
हमारा
नाम
आएगा
ज़माने
की
कोई
दौलत
नहीं
है
माँ
से
बढ़कर
तो
संभाले
रख
यही
दौलत
यहीं
आराम
आएगा
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Prashant Sitapuri
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इन
आँखों
से
तुम्हें
बच्चे
लगे
दिल
मुझे
तो
काँच
के
टुकड़े
लगे
दिल
है
सिर
पे
बोझ
जिसके
मुश्किलों
का
भला
उस
शख़्स
का
कैसे
लगे
दिल
किसी
को
दिल
मैं
अपना
क्या
ही
देता
मुझे
सब
ने
दिए
काँटे
लगे
दिल
उसे
भी
शौक़
है
दिल
तोड़ने
का
मेरी
भी
आरज़ू
उस
सेे
लगे
दिल
मेरी
हालत
जो
देखी
सो
हुआ
ये
कि
मुझको
देखकर
रोने
लगे
दिल
मुहब्बत
मुफ़्त
में
जो
मिल
गई
थी
तभी
शायद
उसे
सस्ते
लगे
दिल
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Prashant Sitapuri
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