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Prashant Sitapuri
rab ho saka gar badla to badle men tum ye kar do
rab ho saka gar badla to badle men tum ye kar do | रब हो सकता गर बदला तो बदले में तुम ये कर दो
- Prashant Sitapuri
रब
हो
सकता
गर
बदला
तो
बदले
में
तुम
ये
कर
दो
माँ
को
मेरी
ठीक
करो
मुझको
बीमार
भले
कर
दो
- Prashant Sitapuri
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क़ुबूल
है
जिन्हें
ग़म
भी
तेरी
ख़ुशी
के
लिए
वो
जी
रहे
हैं
हक़ीक़त
में
ज़िन्दगी
के
लिए
Nasir Kazmi
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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कैसे
दिल
का
हाल
सही
हो
सकता
है
जब-तब
यूँँ
तुम
साड़ी
में
दिख
जाओगी
Tanha
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ
तो
मिल
जाए
लब-ए-शीरीं
से
ज़हर
खाने
की
इजाज़त
ही
सही
Arzoo Lakhnavi
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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जब
राह
झूठ
की
चुनी
तो
लिफ़्ट
भी
मिली
और
सच
की
राह
में
मिले
पैरों
के
बस
निशाँ
Tanoj Dadhich
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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अब
ये
भी
नहीं
ठीक
कि
हर
दर्द
मिटा
दें
कुछ
दर्द
कलेजे
से
लगाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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तमन्ना
ग़ैर
की
कैसे
हो
कोई
फ़न
नहीं
मुझ
में
तुम
इतनी
ख़ूब-सूरत
हो
तमन्ना
कर
भी
सकती
हो
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Prashant Sitapuri
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रिवाज़ेँ,
रस्म
ए
दुनिया
देखकर
सीखा
है
ये
मैंने
लगे
जब
आग
घर
में
अब
किसी
के
तो
हवा
करिए
Prashant Sitapuri
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अदाएँ
मोहब्बत
में
होती
हसीं
हैं
बताओ
मुझे
तुम
में
क्या
कुछ
नया
है
Prashant Sitapuri
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झूठ
बोला
और
अच्छा
बन
गया
अब
जहाँ
में
तौर
ऐसा
बन
गया
उसने
की
थी
चार
बातें
प्यार
से
इसलिए
तो
यार
उसका
बन
गया
जिसकी
आँखों
में
न
थे
आँसू
कभी
एक
दिन
वो
शख़्स
दरिया
बन
गया
मुझको
बनना
था
डीएम
उस
शह्र
का
ये
तेरे
चक्कर
में
मैं
क्या
बन
गया
इक
तुझे
पाने
की
चाहत
में
ख़ुदा
इस
तरह
रोया
कि
बच्चा
बन
गया
अब
उसे
दुल्हन
बना
के
लाना
है
अब
मुक़द्दर
समझो
मेरा
बन
गया
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Prashant Sitapuri
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इन
आँखों
में
दरिया
करना
ठीक
नहीं
है
सो
अब
तुम
सेे
झगड़ा
करना
ठीक
नहीं
है
मैं
तेरा
सारा
का
सारा
हो
सकता
हूँ
इश्क़
तुम्हें
भी
आधा
करना
ठीक
नहीं
है
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Prashant Sitapuri
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