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Avijit Aman
aur koii bhi KHvaahish nahin hai
aur koii bhi KHvaahish nahin hai | और कोई भी ख़्वाहिश नहीं है
- Avijit Aman
और
कोई
भी
ख़्वाहिश
नहीं
है
बस
यही
इक
ज़रूरत
है
मेरी
सब
बहुत
बाद
आते
हैं
इसके
चाय
पहली
मुहब्बत
है
मेरी
- Avijit Aman
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यार
चलता
नहीं
इश्क़
ऐसे
यहाँ
रोज़
सब
सेे
बताते
फिरोगे
अगर
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मुहब्बत
दोस्तों
की
ऐसी
है
मुझ
सेे
ज़रूरत
पड़ने
पर
वो
फोन
करते
हैं
Avijit Aman
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बड़ी
शिद्दत
से
दिल
तोड़ा
है
तुमने
सिला
अच्छा
दिया
है
आशिक़ी
का
Avijit Aman
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जाने
क्यूँँ
रात
का
फिर
बुरा
लग
रहा
इतनी
बरसात
का
फिर
बुरा
लग
रहा
आपने
हाल
पूछा
मेरा
किस
लिए
आपकी
बात
का
फिर
बुरा
लग
रहा
इस
तरह
अब
हमें
याद
मत
आइए
दिल
पे
आघात
का
फिर
बुरा
लग
रहा
आपका
वक़्त
हमको
नहीं
चाहिए
झूठी
खै़रात
का
फिर
बुरा
लग
रहा
कौन
हैं
लोग
क्यूँँ
ये
दु'आ
कर
रहे
उनकी
इमदाद
का
फिर
बुरा
लग
रहा
बिन
पिता
के
कठिन
ज़िंदगी
हो
गई
ऐसे
हालात
का
फिर
बुरा
लग
रहा
क्यूँँ
मिले
थे
कभी
आपसे
हम
'अमन'
उस
मुलाक़ात
का
फिर
बुरा
लग
रहा
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Avijit Aman
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चूमकर
हाथ
मेरे
कहा
उसने
ये
क्या
लिखी
है
ग़ज़ब
शा'इरी
आपने
Avijit Aman
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