hai zamaane ko yahaañ deewaangi ki kuchh zaroorat | है ज़माने को यहाँ दीवानगी की कुछ ज़रूरत

  - Piyush Mishra 'Aab'
हैज़मानेकोयहाँदीवानगीकीकुछज़रूरत
इनपरिंदोंकोज़राआवारगीकीकुछज़रूरत
लगरहाथाख़ुशरहूँगाकामअपनाचलपड़ेगा
पड़रहीहैआजपरनाराज़गीकीकुछज़रूरत
थामुझेमालूमयेअंजामपरयेदेरक्यूँँहै
इसलिएहैआजफिरहैरानगीकीकुछज़रूरत
फिररहाथाइसजहाँमेंजांघअपनीठोंकतापर
आजउसकोपड़गईलाचारगीकीकुछज़रूरत
मौतइकदिनहैमुअय्यनआजफिरडरनाभलाक्यूँँ
आजहैइंसानकोइसज़िंदगीकीकुछज़रूरत
'आब'तुमकोलोगकुछज़्यादाहीहल्कालेरहेहैं
हैतुम्हेंभीदेखलोपेचीदगीकीकुछज़रूरत
  - Piyush Mishra 'Aab'
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