aarzoo-e-visaal-e-yaar to hai | आरज़ू-ए-विसाल-ए-यार तो है

  - Parvez Zaami
आरज़ू-ए-विसाल-ए-यारतोहै
इकक़यामतकाइंतिज़ारतोहै
वस्ल-ए-जानाँकीबातऔरमगर
दर्द-ए-हिज्राँमेंभीक़रारतोहै
जुर्मसंगीनहैतोबिस्मिल्लाह
आपकेहाथमेंकटारतोहै
शुक्रहैदौर-ए-बे-बसीमेंभी
मुस्कुरानेकाइख़्तियारतोहै
देखकरहालत-ए-ज़ुबूँमेरी
हँसकेवोबोलेकुछसुधारतोहै
औरकुछहोहोग़ज़ल-गोई
एकदिलचस्परोज़गारतोहै
लाखइनकारतुमकरो'ज़ामी'
उसपरी-रुख़सेतुमकोप्यारतोहै
  - Parvez Zaami
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