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Pankaj murenvi
khudko rakhna hai zinda to ped lagao
khudko rakhna hai zinda to ped lagao | ख़ुदको रखना है ज़िंदा तो पेड़ लगाओ
- Pankaj murenvi
ख़ुदको
रखना
है
ज़िंदा
तो
पेड़
लगाओ
नफ़रत
के
नइँ
मुहब्बत
के
दो
पेड़
लगाओ
- Pankaj murenvi
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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ये
रंग
रंग
परिंदे
ही
हम
से
अच्छे
हैं
जो
इक
दरख़्त
पे
रहते
हैं
बेलियों
की
तरह
Khaqan Khavar
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वो
पेड़
जिस
की
छाँव
में
कटी
थी
उम्र
गाँव
में
मैं
चूम
चूम
थक
गया
मगर
ये
दिल
भरा
नहीं
Hammad Niyazi
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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बिछड़
के
तुझ
सेे
न
देखा
गया
किसी
का
मिलाप
उड़ा
दिए
हैं
परिंदे
शजर
पे
बैठे
हुए
Adeem Hashmi
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एक
साया
है
घने
पेड़
का
मेरे
सर
पर
एक
आँचल
से
मुझे
ठंडी
हवा
आती
है
Binte Reshma
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हमारा
इश्क़
इबादत
का
अगला
दर्जा
है
ख़ुदा
ने
छोड़
दिया
तो
तुम्हारा
नाम
लिया
ग़मों
से
बैर
था
सो
हमने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
शजर
ने
गिर
के
परिंदों
से
इन्तेक़ाम
लिया
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Balmohan Pandey
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तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
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Varun Anand
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नियम
मुहब्बत
में
देखता
रहा
मैं
और
जब
तक
उसको
गुलाब
दे
आया
कोई
Pankaj murenvi
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तुम
भी
मेरे
जैसे
तन्हा
लगते
हो
तुम
भी
मोहब्बत
में
दिल
से
हारे
हो
Pankaj murenvi
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तू
सब
है
मेरा
तू
रब
है
मेरा
रूठा
क्यूँ
मुझ
सेे
तू
जब
है
मेरा
मैं
कहता
हूँ
तो
तू
लब
है
मेरा
जीता
हूँ
जो
अब
तू
सबब
है
मेरा
बीमार
सा
हूँ
मैं
तू
मतब
है
मेरा
पंकज
के
सुखन
में
तू
लक़ब
है
मेरा
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Pankaj murenvi
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ऐसा
मकाँ
मिला
था
इश्क़
में
हमको
तो
न
रौशनी
को
खिड़की
न
ही
हवा
को
कुछ
Pankaj murenvi
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कभी
सिसकती
हैं
मेरी
आँखें
कभी
झपकती
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
यादों
में
सावन
सी
दिन
रात
टपकती
हैं
मेरी
आँखें
बेलों
सी
मुरझी
इंतिज़ार
में
तिरे
लटकती
हैं
मेरी
आँखें
मिलने
को
तुम
सेे
पंकज
अब
तक
यार
भटकती
हैं
मेरी
आँखें
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Pankaj murenvi
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