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Prashant Prakhar
ham ne chaaha nahin ye na ho vo na ho
ham ne chaaha nahin ye na ho vo na ho | हम ने चाहा नहीं ये न हो वो न हो
- Prashant Prakhar
हम
ने
चाहा
नहीं
ये
न
हो
वो
न
हो
तुम
हमारे
रहो
हो
न
हो
हो
न
हो
आज
दुनिया
क़दम
चूमती
फिर
रही
हो
सके
कल
हमारी
तवज्जो
न
हो
तुम
कहाँ
के
बचोगे
बताओ
ज़रा
कल
अगर
इश्क़
से
इश्क़
मुझको
न
हो
ऐश
की
ज़िंदगी
हर
किसी
की
दु'आ
काश
ऐसा
कभी
शौक़
तुमको
न
हो
इश्क़
के
खेल
में
फिर
न
कोई
मज़ा
हार
इस
में
तुम्हारी
अगर
जो
न
हो
- Prashant Prakhar
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देखिए
तो
भुखमरी
ये
और
गंदी
बस्तियाँ
भी
देश
की
हालत
वही
आईं
गईं
सरकार
कितनी
Prashant Prakhar
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हम
कहाँ
थे
रूबरू
ढलती
हुई
इस
उम्र
से
हम
न
जाने
छोड़
आए
ज़िंदगी
किस
राह
में
Prashant Prakhar
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हर
राह
पर
चलता
हुआ
हर
कारवाँ
आज़ाद
है
अब
ये
ज़मीं
आज़ाद
है
अब
आसमाँ
आज़ाद
है
ख़ातिर
वतन
के
मिट
गईं
लाखों-करोड़ों
हस्तियाँ
जाकर
कहीं
फिर
आज
ये
हिन्दोस्ताँ
आज़ाद
है
हैं
सरहदों
पर
सैकड़ों
वीरों
ने
दी
क़ुर्बानियाँ
देखो
तभी
ये
आज
अपना
आशियाँ
आज़ाद
है
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Prashant Prakhar
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यह
कोई
न
जाने
कैसे
होगा
कब
होगा
जिस
रोज़
ख़ुदा
की
मर्ज़ी
होगी
तब
होगा
सपने
टूटे
अरमाँ
बिखरे
रोना
कैसा
जब
वक़्त
मुवाफ़िक़
तेरे
होगा
सब
होगा
दिल
ने
उसकी
यादों
की
बज़्म
सजाई
है
लगता
है
आज
तमाशा
पूरी
शब
होगा
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Prashant Prakhar
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ग़मों
को
समेटे
चले
जा
रहे
हैं
मुसाफ़िर
अकेले
चले
जा
रहे
हैं
ख़िज़ाँ
का
है
मौसम
निबाहें
तो
कैसे
शजर
से
परिंदे
चले
जा
रहे
हैं
सहर
हो
रही
है
दरीचे
से
उनके
फ़लक
से
सितारे
चले
जा
रहे
हैं
धड़कता
हुआ
ख़त
उन्होंने
था
भेजा
उसी
को
सँभाले
चले
जा
रहे
हैं
जिधर
को
गई
थी
दिवानों
की
टोली
उधर
ही
ज़माने
चले
जा
रहे
हैं
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Prashant Prakhar
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