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Prashant Prakhar
har raah par chaltaa hua har kaarwaan azaad hai
har raah par chaltaa hua har kaarwaan azaad hai | हर राह पर चलता हुआ हर कारवाँ आज़ाद है
- Prashant Prakhar
हर
राह
पर
चलता
हुआ
हर
कारवाँ
आज़ाद
है
अब
ये
ज़मीं
आज़ाद
है
अब
आसमाँ
आज़ाद
है
ख़ातिर
वतन
के
मिट
गईं
लाखों-करोड़ों
हस्तियाँ
जाकर
कहीं
फिर
आज
ये
हिन्दोस्ताँ
आज़ाद
है
हैं
सरहदों
पर
सैकड़ों
वीरों
ने
दी
क़ुर्बानियाँ
देखो
तभी
ये
आज
अपना
आशियाँ
आज़ाद
है
- Prashant Prakhar
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जतन
भी
देखे
शिकस्तगी
भी
सुकून
पाया
ज़फ़र
जो
देखा
नए
परिंदों
के
पंख
देखे
हुआ
अचंभा
हुनर
जो
देखा
Prashant Prakhar
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यह
कोई
न
जाने
कैसे
होगा
कब
होगा
जिस
रोज़
ख़ुदा
की
मर्ज़ी
होगी
तब
होगा
सपने
टूटे
अरमाँ
बिखरे
रोना
कैसा
जब
वक़्त
मुवाफ़िक़
तेरे
होगा
सब
होगा
दिल
ने
उसकी
यादों
की
बज़्म
सजाई
है
लगता
है
आज
तमाशा
पूरी
शब
होगा
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Prashant Prakhar
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दिल
के
कोने-कोने
में
बे-ताबी
है
शायद
उनके
ख़्वाबों
में
हमराही
है
दस्तक
दो
चाहे
लाख
मिन्नतें
कर
लो
रूह
जिसे
सुन
सकती
है
ख़ामोशी
है
तकिए
के
नीचे
उसका
ख़त
सोया
है
मेरे
बाजू
में
सोई
बेचैनी
है
देखो
थककर
लौट
रहा
है
दफ़्तर
से
उसकी
हल्की
जेबों
में
मायूसी
है
इन
बेगानी
राहों
पर
चलते
जाना
आवारा-गर्दी
भी
इक
फ़नकारी
है
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Prashant Prakhar
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मुझे
नहीं
था
कभी
भी
लेकिन
ख़ुदा
पे
उस
दिन
हुआ
भरोसा
दु'आ
की
अगली
घड़ी
ही
मैंने
दु'आ
का
थोड़ा
असर
जो
देखा
Prashant Prakhar
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फटकारती
हैं
रोज़
मेरी
माँ
मुझे
ठहरा
निकम्मा
मैं
सुधरता
ही
नहीं
Prashant Prakhar
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