ज़िंदगी से कोई भी आसरा नहीं मुझे

  - Milan Gautam
ज़िंदगीसेकोईभीआसरानहींमुझे
जोनसीबमेंथावोमिलानहींमुझे
बद-हवा-ए-ऐशसेयेहीइल्तिजाहैअब
मेरेघरकामैंचराग़तूबुझानहींमुझे
इससुरूरसेमुझेकोईहैरतअबनहीं
इश्क़हीहुआमुझेबद-नशानहींमुझे
तूक़िसासकमसेकमबीचदरियामेंले
कश्ती-बानहैतोक्यातूडुबानहींमुझे
मिरेगुमाँकभीहदसेआगेबढ़नामत
बढ़केमेरीनज़रोंमेंतूगिरानहींमुझे
मैंकिसीकाभीमज़ाक़क्यूँँबनाऊँगाभला
हरकिसीकीख़्वारीसेफ़ाएदानहींमुझे
इश्क़करनादुनियामेंबे-हयाईहैअगर
ऐसीबे-हयाईसेफिरहयानहींमुझे
इंक़िसामतौरहैइसजहानका'मिलन'
इंक़िसामकीरज़ाइक-दफ़ानहींमुझे
  - Milan Gautam
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