मआल-ए-इश्क़ मेरा क़त्ल-ए-आम तक पहुँच गया

  - Milan Gautam
मआल-ए-इश्क़मेराक़त्ल-ए-आमतकपहुँचगया
मैंबाइस-ए-जुदाईइंतिक़ामतकपहुँचगया
मज़ाक़हीमज़ाक़मेंकहाथाउसनेप्यारहै
इसीसबबमैंमस्कन-ए-मुदामतकपहुँचगया
मुसीबतोंसेख़ौफ़खानाहैनिशान-ए-बुज़दिली
उठाजोहश्रसेवहीमक़ामतकपहुँचगया
पतायेजबचलावोशख़्सहैकिसीकीजानअब
सोदिलबरीकायेसफ़रविरामतकपहुँचगया
मुशायरेमेंममसुख़नसेअफ़रा-तफ़रीमचगई
मैंशा'इरीसेक़ादिर-उल-कलामतकपहुँचगया
मुक़ाबलेमेंशामकेहैसुब्हकाअलगमज़ा
करामत-ए-सबासमैंख़िरामतकपहुँचगया
नशामिराख़ुमारतकपहुँचगयाथाजब'मिलन'
मैंमय-कदेसेघरमेंमेरेशामतकपहुँचगया
  - Milan Gautam
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