बहार आई थी मगर ये गुल खिले नहीं कभी

  - Milan Gautam
बहारआईथीमगरयेगुलखिलेनहींकभी
इल्तिजाएँकींकभीकिएगिलेनहींकभी
येहीरोंसेजुदाईकाअलमतूपूछराँझोंसे
हमउनसेबिछड़ेहैंवोजिनसेहममिलेनहींकभी
नताइज-ए-मुहारबा-ए-इश्क़उसीकेहक़मेंआए
मिलेहैंऐसेज़ख़्मउम्र-भरसिलेनहींकभी
सभीअधीरथेहमारेइंक़िसामकेलिए
असासहिलगयाज़रूरहमहिलेनहींकभी
तुम्हारीदस्तरसख़ुदातलकहैपरमिरीनहीं
मिरीलकीरोंमेंलिखेयेसिलसिलेनहींकभी
  - Milan Gautam
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