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Praveen Sharma SHAJAR
dekhte hain ki muhabbat men taraqqi kya ho
dekhte hain ki muhabbat men taraqqi kya ho | देखते हैं कि मुहब्बत में तरक़्क़ी क्या हो
- Praveen Sharma SHAJAR
देखते
हैं
कि
मुहब्बत
में
तरक़्क़ी
क्या
हो
इक
बरहमन
ने
कहा
है
कि
ये
साल
अच्छा
है
- Praveen Sharma SHAJAR
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हम
सेे
ऐसा
भला
क्या
नहीं
हो
रहा
क्यूँँ
कोई
भी
हमारा
नहीं
हो
रहा
आपकी
शर्त
भी
मान
लेते
मगर
फ़ाइदा
भी
तो
अपना
नहीं
हो
रहा
दिल
में
हिम्मत
नहीं
है
मुहब्बत
की
और
बिन
मुहब्बत
गुज़ारा
नहीं
हो
रहा
अब
इबादत
न
ज़ाया'
करो
आज
कल
हम
सेे
वैसे
भी
सजदा
नहीं
हो
रहा
गिरते
पड़ते
यहाँ
तक
मैं
आ
तो
गया
लेकिन
आगे
का
रस्ता
नहीं
हो
रहा
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अब
भी
क़िस्सों
की
फ़साने
की
तलब
रहती
है
तेरे
होते
भी
ज़माने
की
तलब
रहती
है
वो
तो
हर
बात
मुझे
सच
ही
बता
देता
है
मुझको
इस
पर
भी
बहाने
की
तलब
रहती
है
मुझको
वैसे
भी
मुहब्बत
नहीं
मिलती
है
कहीं
उसको
भी
प्यार
जताने
की
तलब
रहती
है
हम
तुझे
भीड़
में
कुछ
ऐसे
तलाशे
हैं
शजर
जैसे
तीरों
को
निशाने
की
तलब
रहती
है
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हम
सेे
ऐसा
भला
क्या
नहीं
हो
रहा
क्यूँँ
कोई
भी
हमारा
नहीं
हो
रहा
दिल
में
हिम्मत
नहीं
है
मुहब्बत
की
अब
और
अकेले
गुज़ारा
नहीं
हो
रहा
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तेरे
ख़िलाफ़
अगर
जंग
में
उतारा
गया
तो
साफ़-साफ़
समझ
ले
कि
मैं
तो
मारा
गया
वो
जब
गया
था
तो
कुछ
भी
नहीं
गया
था
मेरा
जब
उसकी
याद
गई
है
तो
हर
सहारा
गया
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मैं
जैसे
कर्ण
हूँ
और
तू
मेरे
कुंडल
कवच
जैसी
तुझे
ख़ुद
से
जुदा
करने
में
क्या
बीती
है
मुझ
सेे
पूछ
Praveen Sharma SHAJAR
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