hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Praveen Sharma SHAJAR
aur to sab theek hai par tum nahin ho
aur to sab theek hai par tum nahin ho | और तो सब ठीक है पर तुम नहीं हो
- Praveen Sharma SHAJAR
और
तो
सब
ठीक
है
पर
तुम
नहीं
हो
और
फिर
क्या
ठीक
है
गर
तुम
नहीं
हो
- Praveen Sharma SHAJAR
Download Sher Image
आग
से
पूछ
रौशनी
क्या
है
ग़ौर
से
देख
ज़िन्दगी
क्या
है
ढूँढ़
कोई
बिलखती
बूढ़ी
माँ
और
फिर
सोच
बेबसी
क्या
है
अपने
ही
दिल
का
ख़ून
ख़ुद
ही
पी
पूछना
तब
ये
शा'इरी
क्या
है
कितनी
नदियों
से
प्यासा
लौटा
हूँ
मैं
समझता
हूँ
तिश्नगी
क्या
है
मैंने
देखा
था
माँ
को
ख़ुश
होते
तब
मैं
समझा
था
ये
ख़ुशी
क्या
है
उलझे
लोगों
से
भी
मिला
हूँ
मैं
जानता
हूँ
कि
सादगी
क्या
है
होंठ
आँखें
वो
मुस्कुराहट
सब
और
बतलाऊँ
क़ीमती
क्या
है
फ़ाइलें
गिन
बलात्कारों
की
तब
तू
समझेगा
आदमी
क्या
है
एक
गाड़ी
अभी
जो
छूटी
है
ये
बताती
है
आख़िरी
क्या
है
मैंने
मीरा
को
रोते
देखा
है
मैं
समझता
हूँ
आशिक़ी
क्या
है
ज़िन्दगी
चल
मिलेगा
फिर
कोई
ऐसी
बातों
पे
रूठती
क्या
है
Read Full
Praveen Sharma SHAJAR
Download Image
0 Likes
मुनाफ़िकों
से
कोई
राब्ता
नहीं
रखता
कि
लौटने
का
तो
मैं
रास्ता
नहीं
रखता
मैं
उस
पे
छोड़
के
बैठा
हूँ
कार
उल्फ़त
भी
वो
एक
शख़्स
जो
पास-ए-वफ़ा
नहीं
रखता
मैं
तोड़
कर
के
दिल
उसका
उसे
रुला
आया
मैं
झूठ-मूठ
का
तो
आसरा
नहीं
रखता
कि
चार
इश्क़
गँवाए
हैं
फिर
भी
ज़िंदा
हूँ
और
आप
कहते
हैं
मैं
हौसला
नहीं
रखता
Read Full
Praveen Sharma SHAJAR
Download Image
0 Likes
तुमने
इतने
तैश
में
दफ़्तर
छोड़ा
है
जैसे
इक
सैनिक
ने
लश्कर
छोड़ा
है
पागल
लड़की
ने
मज़दूर
के
चक्कर
में
देखो
इक
सरकारी
अफ़सर
छोड़ा
है
उसने
इक
मुस्कान
भी
दी
थी
जाते
वक़्त
और
अब
अपनी
बर्थ
पे
नंबर
छोड़ा
है
फिर
से
तुम्हें
पसंद
है
कोई
जाओ
तुम
तुमने
यूँॅं
ही
मुझको
अक्सर
छोड़ा
है
जब
भी
किसी
को
चाहा
पूरा
चाहा
था
जब
छोड़ा
है
उसको
यक्सर
छोड़ा
है
Read Full
Praveen Sharma SHAJAR
Download Image
0 Likes
जानता
हूँ
कि
इस
में
हारूँगा
ख़ुद
को
पर
जंग
में
उतारूँगा
वो
निशाने
पे
है
नहीं
लेकिन
इश्क़
में
तीर
मैं
ही
मारूँगा
तू
मुझे
बस
पिला
दे
थोड़ी
सी
तेरा
सारा
नशा
उतारूँगा
तू
मुझे
होश
में
तो
जाने
दे
तेरा
सारा
नशा
उतारूँगा
ज़िन्दगी
कर
ले
कोशिशें
सारी
मौत
आने
तलक
न
हारूँगा
उसके
चेहरे
में
कुछ
नहीं
रक्खा
सर
से
पैरों
तलक
निहारूँगा
वो
मुझे
एक
पल
नहीं
देता
जिसपे
मैं
ज़िन्दगी
गुज़ारूँगा
और
तो
क्या
करूँँगा
लेकिन
हाँ
इश्क़
में
हौसले
न
हारूँगा
जंग
जीतूँ
मैं
या
नहीं
जीतूँ
बैरी
की
औरतें
न
मारूँगा
जब
तलक
आँख
में
रहेगा
वो
तब
तलक
उसको
मैं
पुकारूँगा
Read Full
Praveen Sharma SHAJAR
Download Image
0 Likes
वफ़ा
थी
इश्क़
था
मासूमियत
थी
तुम्हारे
बाद
सब
कुछ
मर
गया
है
Praveen Sharma SHAJAR
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Ishaara Shayari
Manzil Shayari
Teer Shayari
DP Shayari
Aankhein Shayari