ummeed | “उम्मीद “

  - Praveen Sharma SHAJAR
“उम्मीद
कैसेतन्हाईमेंरोऊँकैसेमहफ़िलमेंहसूँ
ग़मसेसूरतमिरीबर्बादभीहोसकतीहै
बसयहीसोचकेख़ुदकोमैंसजाताहूँरोज़
तुझसेइकरोज़मुलाक़ातभीहोसकतीहै
हैगैरोंसेहीशिकवाहीअपनोंसेसवाल
सबकेसबएकतराजूपेहैंतोलेमुझको
ग़मअगरआगहैतोकहनाजलाएमेरादिल
ग़मसमुंदरहैतोकहनाकिडुबोलेमुझको
ऐसीतन्हाईभीआतीहैकीदिलचीख़पड़ा
ऐसीखुशियाँभीथींकिजिन
मेंमुझेहोशथा
चाहेमंज़रकोईभीआएगएहोंमुझपर
मैंतुझेयादकरताऐसामदहोशथा
अबचलाहूँतेरीजानिबतोयेडरलगताहै
तूपहचानसकेगीमुझेतोक्याहोगा
फिरउसीपलयेख़यालआताहैदिलमेंमेरे
अबतलकभीतेरेबगैरहीजीतारहाहूँ
अबभलाकौनसादुखहैनयाजोदरपरहै
अबभलाकैसीख़िज़ाँहैकिजोमुरझारहाहूँ
तूआएबुलाएतोकोईबातनहीं
परबुलायेआएतोकोईबातभीहोसकतीहै
इतनाकुछसोचकेख़ुदकोमेंसजाताहूँफिर
तुझसेेइकरोज़मुलाक़ातभीहोसकतीहै
  - Praveen Sharma SHAJAR
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