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Praveen Sharma SHAJAR
khayal
khayal | “ख़याल”
- Praveen Sharma SHAJAR
“ख़याल”
मैं
ये
रोज़
सोचता
हूँ
तुमको
फ़ोन
करूँँ
लेकिन
एक
ख़याल
सताता
है
तुम
से
बात
जो
कर
लूँगा
मन
हलका
हो
जाएगा
फिर
तुम
सादा
दिल
भी
हो
मुझको
माफ़
भी
कर
दोगी
फिर
हम
बात
करेंगे
रोज़
मैं
उम्मीद
लगा
लूँगा
फिर
इक
दिन
ऐसा
होगा
तुम
उस
दोस्त
के
पास
में
होगी
मैं
तन्हा
रह
जाऊँगा
फिर
मुझको
रोना
होगा
आख़िर
में
जब
रोना
है
तो
मैंने
ये
सोचा
है
तुमको
फ़ोन
भी
क्यूँँ
करना
मैं
यूँँ
ही
रो
लेता
हूँ
- Praveen Sharma SHAJAR
ख़याल
में
भी
उसे
बे-रिदा
नहीं
किया
है
ये
ज़ुल्म
मुझ
सेे
नहीं
हो
सका
नहीं
किया
है
Ali Zaryoun
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करे
जो
क़ैद
जुनूँ
को
वो
जाल
मत
देना
हो
जिस
में
होश
उसे
ऐसा
हाल
मत
देना
जो
मुझ
सेे
मिलने
का
तुमको
कभी
ख़याल
आए
तो
इस
ख़याल
को
तुम
कल
पे
टाल
मत
देना
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Kashif Adeeb Makanpuri
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भुला
दिया
है
जो
तू
ने
तो
कुछ
मलाल
नहीं
कई
दिनों
से
मुझे
भी
तिरा
ख़याल
नहीं
Navin C. Chaturvedi
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
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Subhan Asad
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बदनज़र
उठने
ही
वाली
थी
किसी
की
जानिब
अपने
बेटी
का
ख़याल
आया
तो
दिल
काँप
गया
Nawaz Deobandi
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तिरा
ख़याल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
कोई
मलाल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
उदास
करती
है
अक्सर
तुम्हारी
याद
मुझे
मगर
ये
हाल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
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Noon Meem Danish
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मुसीबतों
में
तो
याद
करते
ही
हैं
किसी
को
ये
लोग
सारे
मगर
कभी
जो
सुकूँ
में
आए
ख़याल
मेरा
तो
लौट
आना
Hasan Raqim
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ख़याल
कब
से
छुपा
के
ये
मन
में
रक्खा
है
मिरा
क़रार
तुम्हारे
बदन
में
रक्खा
है
Siraj Faisal Khan
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मैं
इस
ख़याल
से
शर्मिंदगी
में
डूब
गया
कि
मेरे
होते
हुए
वो
नदी
में
डूब
गया
Siraj Faisal Khan
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पढ़ने
लिखने
का
शौक़
है
मुझको
आँखें
पढ़ता
हूँ
नज़्में
लिखता
हूँ
Praveen Sharma SHAJAR
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बदन
बदन
सफ़र
किया
मुहब्बतों
की
आस
में
घुटन
घुटन
बसर
किया
मुहब्बतों
की
आस
में
मुझे
ख़बर
नहीं
कि
इश्क़
रूह
का
है
क्या
बला
बदन
लहू
से
तर
किया
मुहब्बतों
की
आस
में
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Praveen Sharma SHAJAR
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ग़म
ने
छोड़ा
तो
ख़ुशी
से
मर
गए
मौत
जैसी
ज़िंदगी
से
मर
गए
हम
असीर-ए-ज़ब्त
रो
पाए
नहीं
और
फिर
बस
बे-बसी
से
मर
गए
तुम
सेे
पहले
भी
तो
की
थी
आशिक़ी
पर
तुम्हारी
आशिक़ी
से
मर
गए
पास
बैठी
एक
पल
को
ज़िन्दगी
और
हम
बस
इस
ख़ुशी
से
मर
गए
हम
शराबी
बन
न
पाए
ठीक
से
पीते
पीते
मयकशी
से
मर
गए
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Praveen Sharma SHAJAR
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दिल
तो
शीशा
था
टूट
जाना
था
हमको
तो
आँसू
ही
बहाना
था
उनकी
नज़रें
थीं
दुश्मनों
की
ओर
मेरे
दिल
पर
मगर
निशाना
था
मरते-मरते
हमें
ख़याल
आया
ज़िंदगी
थी
कि
ये
फ़साना
था
हमने
वो
ख़्वाब
कर
दिए
मिट्टी
जिनकी
तामीर
इक
ख़ज़ाना
था
हम
तो
गुमनाम
हो
गए
हैं
ख़ुद
हमने
कुछ
ढूँढ़
कर
दिखाना
था
आपका
ही
क़ुसूर
है
सारा
आपको
ही
तो
दिल
लगाना
था
अब
तो
ख़ुद
पर
यक़ीं
नहीं
हमको
कल
तलक
पुर-यक़ीं
ज़माना
था
हमको
करनी
थी
रौशनी
यूँँ
भी
अपनी
क़िस्मत
में
जल
ही
जाना
था
आपसे
अब
भला
शिकायत
क्या
आपने
अपना
रंग
दिखाना
था
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Praveen Sharma SHAJAR
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मुझको
जीने
का
हौसला
दीजे
वरना
रिश्तों
का
फ़ाएदा
क्या
है
Praveen Sharma SHAJAR
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