khayal | “ख़याल”

  - Praveen Sharma SHAJAR
“ख़याल”
मैंयेरोज़सोचताहूँ
तुमकोफ़ोनकरूँँलेकिन
एकख़यालसताताहै
तुमसेबातजोकरलूँगा
मनहलकाहोजाएगा
फिरतुमसादादिलभीहो
मुझकोमाफ़भीकरदोगी
फिरहमबातकरेंगेरोज़
मैंउम्मीदलगालूँगा
फिरइकदिनऐसाहोगा
तुमउसदोस्तकेपासमेंहोगी
मैंतन्हारहजाऊँगा
फिरमुझकोरोनाहोगा
आख़िरमेंजबरोनाहै
तोमैंनेयेसोचाहै
तुमकोफ़ोनभीक्यूँँकरना
मैंयूँँहीरोलेताहूँ
  - Praveen Sharma SHAJAR
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