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Praveen Sharma SHAJAR
uski bastii men insaan aa.e hue the main kya baat karta
uski bastii men insaan aa.e hue the main kya baat karta | उसकी बस्ती में इंसान आए हुए थे मैं क्या बात करता
- Praveen Sharma SHAJAR
उसकी
बस्ती
में
इंसान
आए
हुए
थे
मैं
क्या
बात
करता
उसने
होंठों
पे
ताले
लगाए
हुए
थे
मैं
क्या
बात
करता
मैंने
कोशिश
बहुत
की
बहुत
बरग़लाया
मगर
कुछ
न
बोली
उसने
दुख
सारे
दिल
में
छुपाए
हुए
थे
मैं
क्या
बात
करता
वो
अकेली
जो
मिलती
तो
लड़ता
झगड़ता
शिकायत
भी
होती
उसकी
शादी
थी
मेहमान
आए
हुए
थे
मैं
क्या
बात
करता
- Praveen Sharma SHAJAR
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जहल-ए-ख़िरद
ने
दिन
ये
दिखाए
घट
गए
इंसाँ
बढ़
गए
साए
Jigar Moradabadi
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सब
से
पुर-अम्न
वाक़िआ
ये
है
आदमी
आदमी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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देख
कर
इंसान
की
बेचारगी
शाम
से
पहले
परिंदे
सो
गए
Iffat Zarrin
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इत्तिफ़ाक़
अपनी
जगह
ख़ुश-क़िस्मती
अपनी
जगह
ख़ुद
बनाता
है
जहाँ
में
आदमी
अपनी
जगह
Anwar Shaoor
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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वो
मुझ
को
छोड़
के
जिस
आदमी
के
पास
गया
बराबरी
का
भी
होता
तो
सब्र
आ
जाता
Parveen Shakir
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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नस्ल-ए-आदम
रफ़्ता
रफ़्ता
ख़ुद
को
कर
लेगी
तबाह
इतनी
सख़्ती
से
क़यामत
पेश
आएगी
न
पूछ
Abhinandan pandey
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देवताओं
का
ख़ुदास
होगा
काम
आदमी
को
आदमी
दरकार
है
Firaq Gorakhpuri
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तुम
सेे
मिलकर
यूँँ
लगता
है
जैसे
बाग़
में
फूल
खिला
है
तुम
अपने
से
क्यूँँ
लगते
हो
मेरा
तुम
सेे
क्या
रिश्ता
है
हमने
इश्क़
तो
छोड़
दिया
था
इश्क़
ने
पर
किसको
छोड़ा
है
और
भला
अब
क्या
बतलाऊँ
हाल
मिरा
भी
तुम
जैसा
है
लेकिन
अच्छा
क्या
तुमको
भी
और
कोई
अच्छा
लगता
है
तुम
सेे
बेहतर
कौन
मिलेगा
पर
तुमने
भी
कब
मिलना
है
तुम
अच्छी
लड़की
हो
लेकिन
क्या
वो
भी
अच्छा
लड़का
है
नाम
पता
चेहरा
आवाज़ें
तू
तो
सब
कुछ
भूल
चुका
है
मैं
तो
इक
रोता
चेहरा
हूँ
रोता
चेहरा
कहाँ
बिका
है
वो
लड़की
तो
अनपढ़
थी
ना
उस
का
ख़त
किसने
लिक्खा
है
अब
तो
मैसेंजर
चलते
हैं
ख़त
का
ज़माना
कहाँ
बचा
है
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Praveen Sharma SHAJAR
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मैं
जैसे
कर्ण
हूँ
और
तू
मेरे
कुंडल
कवच
जैसी
तुझे
ख़ुद
से
जुदा
करने
में
क्या
बीती
है
मुझ
सेे
पूछ
Praveen Sharma SHAJAR
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ख़ुशी
के
गीत
गाए
जा
रहा
हूँ
मैं
इक
सदमा
दबाए
जा
रहा
हूँ
मेरे
दिल
पर
अभी
है
वेहशत-ए-बू
सो
ख़ुशबू
में
नहाए
जा
रहा
हूँ
वो
मुझको
छोड़
देना
चाहती
है
मगर
मैं
ही
निभाए
जा
रहा
हूँ
शग़फ़
तितली
से
मुझको
क्या
रहेगी
मैं
रस्म-ए-गुल
निभाये
जा
रहा
हूँ
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Praveen Sharma SHAJAR
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प्यार
से
घर
नहीं
चलता
साहब
इसलिए
शा'इरी
भी
करते
हैं
Praveen Sharma SHAJAR
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तेरे
ख़िलाफ़
अगर
जंग
में
उतारा
गया
तो
साफ़-साफ़
समझ
ले
कि
मैं
तो
मारा
गया
वो
जब
गया
था
तो
कुछ
भी
नहीं
गया
था
मेरा
जब
उसकी
याद
गई
है
तो
हर
सहारा
गया
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Praveen Sharma SHAJAR
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