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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
ab din dhale hain dariyaa tareek lag raha hai
ab din dhale hain dariyaa tareek lag raha hai | अब दिन ढले हैं दरिया तारीक लग रहा है
- Nikhil Tiwari 'Nazeel'
अब
दिन
ढले
हैं
दरिया
तारीक
लग
रहा
है
वो
आख़िरी
किनारा
नज़दीक
लग
रहा
है
जो
हाल
है
कि
तुझ
सेे
अब
क्या
कहें
ख़ुदाया
कुछ
ठीक
तो
नहीं
है
पर
ठीक
लग
रहा
है
- Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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रहनुमा
आज
डर
गए
होंगे
गांव
में
ही
ठहर
गए
होंगे
सौ
जनों
का
हमें
पता
है
पर
आदतन
दो
मुकर
गए
होंगे
शम्स
को
रू-ब-रू
बिठाते
हैं
ख़ास
चश्में
उतर
गए
होंगे
शहर
के
बद-तमीज़
से
लड़के
आख़री
बार
घर
गए
होंगे
इश्क़
का
फ़ाएदा
बताते
थे
अब
यक़ीनन
सुधर
गए
होंगे
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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हर
शाम
बहती
है
ग़ज़ल
ठंडी
हवाओं
की
तरह
आ
बैठ
कर
मैं
ज़ुल्फ़
तेरी
क़ाफ़िए
से
बाँध
दूँ
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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अगर
दौलत
ख़ुदा
में
से
कोई
भी
एक
चुनना
हो
तो
तुम
ये
देख
लेना
सर
कहाँ
ज़्यादा
झुके
हैं
बस
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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जब
क़िस्मत
का
अच्छा
होना
होता
है
पत्थर
छू
लेने
से
सोना
होता
है
खप
जाता
है
जीवन
कुछ-कुछ
पाने
में
फिर
आख़िर
में
सब
कुछ
खोना
होता
है
आधे
तो
हम
बँट
जाते
हैं
महफ़िल
में
आधा
पैकर
ख़ुद
को
ढोना
होता
है
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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याद-ए-माज़ी
ठीक
नहीं
है
कह
दो
कुछ
भी
ठीक
नहीं
है
आँखों
से
कुछ
अश्क़
बहाओ
इतनी
ख़ुश्की
ठीक
नहीं
है
सब
कहते
हैं
ज़ीस्त
हमारी
पहले
जैसी
ठीक
नहीं
है
अब
लगता
है
यार
ख़ुदास
ज़्यादा
अर्ज़ी
ठीक
नहीं
है
सागर
ने
अफ़वाह
उड़ाई
बहता
पानी
ठीक
नहीं
है
मँझधारों
से
जूझ
रहे
हैं
जिन
की
कश्ती
ठीक
नहीं
है
सारे
पंछी
लौट
गए
हैं
अब
वो
बस्ती
ठीक
नहीं
है
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