gustaakh nigaahon kii kuchh aur kahaanii hai | गुस्ताख़ निगाहों की कुछ और कहानी है

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'
गुस्ताख़निगाहोंकीकुछऔरकहानीहै
कुछबातरहीहोगीजोयादज़बानीहै
महरूमकियाजाएहरएकशिफ़ा-दाँको
येज़ख़्मसुख़न-वरकीमशहूरनिशानीहै
मैंशर्तलगाताहूँहरशख़्सबनालेगा
महबूबकिवोजोइकतस्वीरपुरानीहै
जोहाथलगेलेजायाआगलगाउसको
इसघरसेमुझेउनकीहरचीज़हटानीहै
साक़ीयेतिरेपहलूमेंजामबचाहैक्या
तूदेखअगरहोतोदोऔरपिलानीहै
मैंरूहजलाताहूँजिसबज़्मकेकोनेमें
सुनतीहैंग़ज़लमेरीदीवारदिवानीहै
जोइश्क़करेंगेतोयेबातसमझलेंगे
इसखेलकेआख़िरमेंबसजानगँवानीहै
  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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