khaar hi khaar hain gulaab nahin | ख़ार ही ख़ार हैं गुलाब नहीं

  - Neeraj Naveed
ख़ारहीख़ारहैंगुलाबनहीं
उसकेतोहफ़ेकाभीजवाबनहीं
चाँदहोतुममैंइकचराग़सही
परमैंसूरजसेफ़ैज़याबनहीं
नींदटूटेगीजानजाओगे
मैंहक़ीक़तहूँकोईख़्वाबनहीं
सबकोऔक़ातकेसिवाबख़्शा
रहमतोंकातिरीहिसाबनहीं
जोभीमाँगामिलाहमेंलेकिन
इकवहीहैजोदस्तियाबनहीं
हुस्नसजकरबहुतनिखरताहै
सादगीकामगरजवाबनहीं
इश्क़कीक़ैदसनिकलनेको
कोईतरक़ीबकामयाबनहीं
ऐसीतक़दीरभीहो“नीरज”
शाम-ए-हिज्रहैऔरशराबनहीं
  - Neeraj Naveed
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