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Navneet krishna
use main jaanta hooñ ab
use main jaanta hooñ ab | उसे मैं जानता हूँ अब
- Navneet krishna
उसे
मैं
जानता
हूँ
अब
जो
लोगों
को
बनाता
है
रहे
नवनीत
से
आशा
नई
वो
धुन
सुनाता
है
- Navneet krishna
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कमी
न
की
तिरे
वहशी
ने
ख़ाक
उड़ाने
में
जुनूँ
का
नाम
उछलता
रहा
ज़माने
में
Firaq Gorakhpuri
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ऐ
मिरी
ज़ात
के
सुकूँ
आ
जा
थम
न
जाए
कहीं
जुनूँ
आ
जा
इस
से
पहले
कि
मैं
अज़िय्यत
में
अपनी
आँखों
को
नोच
लूँ
आ
जा
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Fareeha Naqvi
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बाद-ए-बहार
में
सब
आतिश
जुनून
की
है
हर
साल
आवती
है
गर्मी
में
फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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बे-ख़ुदी
बे-सबब
नहीं
'ग़ालिब'
कुछ
तो
है
जिस
की
पर्दा-दारी
है
Mirza Ghalib
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हर
एक
सम्त
यहाँ
वहशतों
का
मस्कन
है
जुनूँ
के
वास्ते
सहरा
ओ
आशियाना
क्या
Azhar Iqbal
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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एक
से
एक
जुनूँ
का
मारा
इस
बस्ती
में
रहता
है
एक
हमीं
हुशियार
थे
यारो
एक
हमीं
बद-नाम
हुए
Ibn E Insha
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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ये
कैसा
नश्शा
है
मैं
किस
अजब
ख़ुमार
में
हूँ
तू
आ
के
जा
भी
चुका
है
मैं
इंतिज़ार
में
हूँ
Muneer Niyazi
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उसने
बुलवाया
मुझे
जाना
पड़ा
बेसबब
ही
मुझको
मुस्काना
पड़ा
Navneet krishna
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तुम
तो
ऊँचे
घराने
से
हो
हम
ही
मुफ़लिस
सनम
रह
गए
Navneet krishna
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इश्क़
में
है
आने
वाला
और
क्या
रोज़
धोखा
खाने
वाला
और
क्या
किसका
चेहरा
था
हमारे
ख़्वाब
में
होगा
कोई
आने
वाला
और
क्या
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Navneet krishna
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ख़ुदा
की
देन
है
और
यह
फ़लक
से
नाज़िल
है
हमारे
ग़म
को
मुसलसल
उरूज़
हासिल
है
Navneet krishna
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हो
गया
मशहूर
मैं
दीवाना
तेरे
शहर
में
बन
गया
अफ़साने
का
अफ़साना
तेरे
शहर
में
Navneet krishna
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