tum kab aaogi | "तुम कब आओगी"

  - Navneet Vatsal Sahil
"तुमकबआओगी"
कितनेदिनगुज़रेतुम्हेंगएहुए
तुमनेमुड़करदेखेहुए
कोईख़तकोईख़बरहीभेजीतुमने
तुमजानतीहो?
तुम्हारेबादक्याहुआ
वोबिल्लियांजोतुम्हारेहोतेहुए
कोसोंदूररहतीथी
मेरेआस-पासघूमनेलगीहैं
कौएजोघरकेऊपरसे
गुज़रतेतकथे
मुंडेरपरबैठेरहतेहैं
जालेजोतुमनेहटायेथेकभी
मकड़ियोंनेफिरसेबनालिएहैंसारेघरमें
एकपेड़जोसहनमें
तुमलगाकरगईथी
दमतोड़रहाहै
उसेपानीदेनेवालाकोईभीतोनहीं
कुछख़बरभेजोअपनी
"घरकबआओगी?"
मैंथकचुकाहूँ
इनबिल्लियों,कौओकोभगाताहुआ
जालोंकोहटातापेड़कोबचाताहुआ
एकदियाजोमुंतज़िरहै
बुझनेकोहै
इसकीसांसोंकातोइंतज़ामभेजो
झूठासहीइकपैग़ामभेजो
कि"तुमआओगी,तुमज़रूरआओगी"
  - Navneet Vatsal Sahil
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