वक़्त कम था सो घड़ी उस सेे छुपाए रक्खी

  - Naaz ishq
वक़्तकमथासोघड़ीउससेेछुपाएरक्खी
औरकोईकोईबातचलाएरक्खी
उसनेदीपककोहवाओंकेहवालेकरके
चार-सूँहाथोंसेदीवारबनाएरक्खी
यादहोभीकिहोउसकोकिउसनेकहीथी
हमनेजोबातसदादिलसेलगाएरक्खी
उसनेदिलतोड़दियाऔरसमेटेरक्खा
हमबिखरतेगएपरधारबचाएरक्खी
साथथातोकिसीनेकुछकहाउसकेखिलाफ़
औरजबबिछड़ातोहरशख़्सनेराएरक्खी
रौशनीकरतेगएवादा-ओ-पैमाँतेरे
उम्रभरदिलमेंमगरआगलगाएरक्खी
इसभरममेंकिकिसीरोज़पलटआएगावो
इकग़ज़लउसकेलिएहमनेसजाएरक्खी
पाकइरादोंकोमेरेदेखज़रा'नाज़'कितू
ख़्वाबमेंआयाभीतोसामनेचाएरक्खी
  - Naaz ishq
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