yaar ka zikr hua ahd-e-sukhan men jaise | यार का ज़िक्र हुआ अहद-ए-सुख़न में जैसे

  - Naaz ishq
यारकाज़िक्रहुआअहद-ए-सुख़नमेंजैसे
चाशनीघुलगईहोगुड़कीरसनमेंजैसे
कभीउठतेसेसुनोसुब्हकालहजाउसका
किसीकोयलकेसुर-ओ-तालथकनमेंजैसे
आशनाईथीतकल्लुफ़सेभरीपहलेपहल
बर्क़उठतीथीउसेदेखबदनमेंजैसे
अव्वलअव्वलतोकियाउसकीहवसपेतन्क़ीद
निय्यतेंपाकबड़ीथीमेरेमनमेंजैसे
बिलकुलऐसीहीलकीरेंमेरेहाथोंपेहैं
उसकीपेशानीपेउभरीथीशिकनमेंजैसे
जा-ब-जादेखरहीउसकीनिगाह-ए-सय्याद
चीलउड़तीहोकोईनीलगगनमेंजैसे
हैगुमाँउसकोभीयासिर्फ़मुझीकोहैभरम
कियहाँतपरहेहैंलोगजलनमेंजैसे
रुतखिजाँकीथीमगरगुलसरउठानेलगेहैं
उसकीआमदकीख़बरमहकीचमनमेंजैसे
शे'रतोशे'रमगरमिसरेभीऐसेहैकि'नाज़'
अप्सराहैवोपुराणऔरकथनमेंजैसे
  - Naaz ishq
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