khud se milne ke vo imkaan nahin dekhta hai | ख़ुदस मिलने के वो इमकान नहीं देखता है

  - Musarif Husain Mansoori
ख़ुदसमिलनेकेवोइमकाननहींदेखताहै
जोकभीदश्त-ओ-बयाबाननहींदेखताहै
जिसकेहोनेसेहैइसदुनियामेंसायोंकावुजूद
कोईउसधूपकेअहसाननहींदेखताहै
जिसकीमंज़िलपेनज़रहोवोमुसाफ़िरहरगिज़
राहमुश्किलहैयाआसाननहींदेखताहै
दुखसमझताहैजोकाँटोंसेघिरेफूलोंका
वोफ़क़तफूलोंकीमुस्काननहींदेखताहै
देखताहैयेजहाँध्यानसेनज़रेंमेरी
परकहाँपरहैमेराध्याननहींदेखताहै
छोड़जाएगावोरोताहुआइकरोज़मुझे
जोअभीमुझकोपरेशाननहींदेखताहै
  - Musarif Husain Mansoori
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