tootaa hai hal kisaan ka usii kisaan pe | टूटता है हल किसान का उसी किसान पे

  - Vikas Shah musafir
टूटताहैहलकिसानकाउसीकिसानपे
तबकहींअनाजआताहैयहाँउठानपे
मैंउसीसेभीखमाँगतारहाहूँरहमकी
ज़ुल्मकररहाथाजोमेरेहीख़ानदानपे
हाँमुझेनहींहैफ़िक्रअबकिसीभीबातका
क्यूँकिहैमुझेगुमानअपनीइसज़बानपे
देखलोयेहोरहाहैहरजगहमेरेख़ुदा
ख़ुशहैंसबजहानमेंग़लतकेकामरानपे
जबमैंचलरहाथाहक़कीओरउसक़तारमें
कोईसाथमेंनहींथाजंगकीढलानपे
जाएदादवालिदैनसेभीख़ासहोगई
झगड़ेहोरहेहैंअबलगेहुएनिशानपे
  - Vikas Shah musafir
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy