pata hai sab mujhe ai dost tu kya kar raha hai | पता है सब मुझे ऐ दोस्त तू क्या कर रहा है

  - Vikas Shah musafir
पताहैसबमुझेदोस्ततूक्याकररहाहै
तूमेरेदुश्मनोंसेमिलकेधोखाकररहाहै
फ़रोग़-ए-'इश्क़-ए-आदतअबमेरीडालऐसी
दिल-ए-हरक्यूँतूबारंबारऐसाकररहाहै
ज़रासाआगेनिकलातोख़फ़ाहोनेलगेसब
येआदतहैजहाँकीतोवोशिकवाकररहाहै
किसीसेकुछनहींकहनातहम्मुलसारखोबस
ख़ुदादेगाउसेवैसाजोजैसाकररहाहै
येहमसबआख़िरी-दीदारदुनियाकररहेहैं
येकल-युगहैयहाँमुंसिफ़भीसौदाकररहाहै
निशान-ए-हिज्रदिखताहैतेरीइनबातोंमेंपीर
मुसाफ़िरइसतरहक्यूँक़त्लख़ुदकाकररहाहै
  - Vikas Shah musafir
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