maan jaao abhii main tumko manaa saka hooñ | मान जाओ अभी मैं तुमको मना सकता हूँ

  - Vikas Shah musafir
मानजाओअभीमैंतुमकोमनासकताहूँ
मैंअभीतुमपेदिल-ओ-जानलुटासकताहूँ
तुमकभीभीमुझेयूँँछोड़केमतजानाअब
तुमअगरसाथहोतोदूरीमिटासकताहूँ
कोईऔक़ातपेजाएतोवोपछताएफिर
दस्तरसऐसीभीअपनीमैंबनासकताहूँ
मेरेहमदर्दनेबे-रहमीसेतड़पायाहै
ज़ख़्मजोजोदिएउसनेवोदिखासकताहूँ
कोईउम्मीदनहींहैमेरीउससेइसबार
गरवोमेरीनहींतोछोड़केजासकताहूँ
क्यूँखफ़ारहतेहोबोलोमैंमुसाफ़िरहूँएक
क्यूँमुहब्ब्तकीथीमुझसेेमैंभुलासकताहूँ
  - Vikas Shah musafir
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