kya gham hai muqaddar ka bataa bhi nahin saktaa | क्या ग़म है मुक़द्दर का बता भी नहीं सकता

  - Vikas Shah musafir
क्याग़महैमुक़द्दरकाबताभीनहींसकता
औरहैजोमुक़द्दरमेंमिटाभीनहींसकता
दुखतीनशोंकादर्दभीपड़ताहैछुपाना
दुनियाकोनज़ारायेदिखाभीनहींसकता
जोभीहैसबबमौतकावोमुझकोपताहै
सोतारसेमैंहाथहटाभीनहींसकता
इकअरसेसेहैंबंदसभीरस्तेमेरेसो
मैंहाथकहींअपनाबढ़ाभीनहींसकता
आईनेमेंवोदिखरहामुझकोमेरादुश्मन
गोलीहैमगरउसपेचलाभीनहींसकता
  - Vikas Shah musafir
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy