jab jahaan men koi saccha koi qaamil nain raha | जब जहाँ में कोई सच्चा कोई क़ामिल नइँ रहा

  - Vikas Shah musafir
जबजहाँमेंकोईसच्चाकोईक़ामिलनइँरहा
तबसेइनतालाबोंमेंकोईअनादिलनइँरहा
पढ़रहीहैइनदिनोंवोशा'इरीभीग़ैरकी
अबपसंदोंमेंमैंउसकीख़ासशामिलनइँरहा
बदलीदुनियाटेक्नोलॉजीकेबढ़जानेकेबाद
फिरयहाँपरतबसेकोईकाममुश्किलनइँरहा
मैंमुक़दमाभीनहींकरपायाउसपेकोईभी
क़त्लभीमेराकियाहैऔरक़ातिलनइँरहा
एकहीलड़कीपेदिलहरबारक्यूँजाताहै
इतनाटूटाहैयेपागलमेरादिलदिलनइँरहा
मयकोवोपीतारहायामयउसेपीतीरही
दिन-ब-दिनइतनाघटाहैवोकितिल-तिलनइँरहा
मेरीकश्तीडूबीभीतोडूबीसाहिलकेक़रीब
आशाकेक़ाबिलतोयेसाहिलभीसाहिलनइँरहा
  - Vikas Shah musafir
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