kidhar kin raaston se yuñ tu tanhaa ho ke guzri hai | किधर किन रास्तों से यूँँ तू तन्हा हो के गुज़री है

  - ABHIJIT SINGH
किधरकिनरास्तोंसेयूँँतूतन्हाहोकेगुज़रीहै
मैंउनझीलोंकापानीहूँतूजिन
मेंरोकेगुज़रीहै
समुंदरक़ैदथासीनेमेंमेरेफिरहुआऐसा
नमकमेंतूभीअपनेज़ख़्मसारेधोकेगुज़रीहै
बहुतबेचैनगुज़रेहैंमेरेदिनऔरमेरीरातें
कहानीकिसगलीकीथीकहाँसेहोकेगुज़रीहै
गुज़रनाथाहमेंजिनरास्तोंसेसाथमेंमुर्शद
येदुनियाअबवहाँपरकितनेकाँटेंबोकेगुज़रीहै
कहींजोहमदिखाईदेंतोख़ामोशीसेचलदेना
समझनाहमनहींवोइश्क़जोतूखोकेगुज़रीहै
मैंरस्तेदेखतेरहजाऊँगाऔरतूभीमतआना
नदीभीक्याकभीइनबंजरोंसेहोकेगुज़रीहै
  - ABHIJIT SINGH
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