nam aañkhen ye apni kisi pal bhigote hue | नम आँखें ये अपनी किसी पल भिगोते हुए

  - Muntazir suraj
नमआँखेंयेअपनीकिसीपलभिगोतेहुए
बहादूँगाबीनाईमैंअपनीरोतेहुए
उसअब्र-ए-रवाँसेनहींख़ासशिकवामगर
मुयस्सरथावोमुझेमेराहोतेहुए
ख़यालाततेरेकिसोनेनहींदेतेऔर
तिरेख़्वाबहीदेखताहूँमैंसोतेहुए
अबउससेनहींख़ासकोईगिलाभीमगर
मुझेचाहताथाकिखोएवोरोतेहुए
कभीपैरहनमैंऐसाकरूँँदाग़-दार
तुम्हेंबूकिसीकीपाएधोतेहुए
ख़ुदाकीइनायतहैयहजोहैंहम'मुंतज़िर'
उसेवर्नाउम्मीदेंखोदीथीखोतेहुए
  - Muntazir suraj
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