गई इस रुत तलक मेरा भी इक ग़म-ख़्वार था कोई

  - Muntazir suraj
गईइसरुततलकमेराभीइकग़म-ख़्वारथाकोई
अजबइसहदतलकज़ेर-ए-असरमेरेरहाकोई
मुयस्सरवोकिसीकोअबहुआतोहैमगरमुझको
थामंज़ूरउसकेख़्वाबतकभीदेखताकोई
नहींरोज़-ए-अज़लसेख़ामुशीमेरीपसंदीदा
रहाहमराज़वोमेराथामुझसेआश्नाकोई
कहींवोज़िंदगीकेइससफ़रमेंहमसेटकराए
ख़ुदायाकरकभीपड़जाएऐसावाक़िआकोई
तवज्जोहसेकिसीकीथायहाँआलमबहारोंका
मगरजिसरोज़सेउठकरयहाँसेहैगयाकोई
भुलाईउसनेतोमेरेलिएमेरीख़ताएँभी
ख़ुदायाहैगिलाबसयेमेराबनसकाकोई
सबबहोकोईवाजिदभीउसकोचाहनेका'श्रेय'
बसउसकाहोनाला-हासिलनहींहैमुद्दआकोई
  - Muntazir suraj
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy