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Muneer shehryaar
karz maa ka na hamse ada ho kabhi
karz maa ka na hamse ada ho kabhi | कर्ज़ माँ का न हम सेे अदा हो कभी
- Muneer shehryaar
कर्ज़
माँ
का
न
हम
सेे
अदा
हो
कभी
फिर
भी
बदले
में
माँ
को
ह़ँसा
दो
कभी
इसके
ज़िंदा
ही
रहने
से
घर-बार
है
साया
माँ
का
ना
सर
से
जुदा
हो
कभी
- Muneer shehryaar
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कुछ
इस
अदास
मोहब्बत-शनास
होना
है
ख़ुशी
के
बाब
में
मुझ
को
उदास
होना
है
Rahul Jha
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शहर-ए-जाँ
में
वबाओं
का
इक
दौर
था
मैं
अदा-ए-तनफ़्फ़ुस
में
कमज़ोर
था
Pallav Mishra
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सुन
ओ
कहानीकार
कोई
ऐसा
रोल
दे
ऐसे
अदा
करूँं
मेरी
इज़्ज़त
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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हम
तो
उस
आँख
के
हैं
देखने
वाले,
देखो
जिस
में
शोख़ी
है
बहुत
और
हया
थोड़ी
सी
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Dagh Dehlvi
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लग
रहा
है
ये
नर्म
लहजे
से
फिर
तुझे
कोई
मसअला
हुआ
है
Jawwad Sheikh
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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क्यूँँ
पशेमाँ
हो
अगर
वअ'दा
वफ़ा
हो
न
सका
कहीं
वादे
भी
निभाने
के
लिए
होते
हैं
Ibrat Machlishahri
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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इक
नज़ाकत
से
मुझे
उसने
पागल
बोला
जब
मैंने
चूम
लिया
प्यार
से
उसके
लब
को
Parwez Akhtar
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हया
से
सर
झुका
लेना
अदास
मुस्कुरा
देना
हसीनों
को
भी
कितना
सहल
है
बिजली
गिरा
देना
Akbar Allahabadi
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जो
कहता
है
कि
अच्छी
कट
रही
है
उसी
से
सारी
बस्ती
कट
रही
है
कहीं
पर
कोई
शहज़ादा
खड़ा
है
कहीं
दाँतों
से
उंगली
कट
रही
है
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Muneer shehryaar
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बाबर
बना
दिया
कभी
अकबर
बना
दिया
जिसको
ख़ुदा
ने
चाहा
सिकंदर
बना
दिया
Muneer shehryaar
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वो
जो
कहता
है
मेरा
ख़ुदा
एक
है
बस
हमारा
वही
रहनुमा
एक
है
तुम
भी
तड़पो
उधर
हम
भी
तपड़े
इधर
बस
हमारी
तुम्हारी
सज़ा
एक
है
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Muneer shehryaar
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ये
मोहब्बत
में
उसकी
भलाई
तो
है
मेरे
हाथों
में
उसकी
कलाई
तो
है
कह
रही
थी
जो
तुम
सेे
मोहब्बत
नहीं
मेरी
महफ़िल
में
लेकिन
वो
आई
तो
है
लोग
तारीफ़
करते
हैं
जिसकी
यहाँ
उस
में
थोड़ी
मगर
बे-वफ़ाई
तो
है
नींद
आती
नहीं
है
यही
सोच
कर
इस
महीने
में
उसकी
सगाई
तो
है
कौन
कहता
है
उसको
मोहब्बत
नहीं
वो
मुझे
देख
कर
मुस्कुराई
तो
है
कोई
उसकी
बुराई
न
मुझ
सेे
करे
चाहे
जैसा
है
वो
मेरा
भाई
तो
है
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Muneer shehryaar
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सब
से
ता'रीफ़
मेरी
मत
करना
इस
में
कुछ
लोग
मर
ही
जाएंँगे
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Muneer shehryaar
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