naye chehron ka peecha kar raha hooñ | नए चेहरों का पीछा कर रहा हूँ

  - Mukesh Jha
नएचेहरोंकापीछाकररहाहूँ
मैंअपनाज़ख़्मगहराकररहाहूँ
मुहब्बतमेंमुझेलगताहैअक्सर
मैंख़ुदकेसाथधोखाकररहाहूँ
चलोदेखेंयेकबतकसाथदेगी
मैंसाँसोंपेभरोसाकररहाहूँ
मुझेमिलतानहींमिलनेकामौक़ा
मगरफिरभीमैंवा'दाकररहाहूँ
समझआतानहींहैग़मकिसीको
सोहँसनेकादिखावाकररहाहूँ
गुज़रजाएख़ुशीसेज़िन्दगीअब
किसीकीयादइकट्ठाकररहाहूँ
जिन्हेंमतलबनहींमेरेदुखोंसे
उन्हींलोगोंसेशिकवाकररहाहूँ
जहाँपरचीख़तीहैख़ामुशीभी
वहाँमैंख़ुदकोगूँगाकररहाहूँ
  - Mukesh Jha
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy