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Mohit Subran
koi to hai jo man hi man mujhe aawaaz deta hai
koi to hai jo man hi man mujhe aawaaz deta hai | कोई तो है जो मन ही मन मुझे आवाज़ देता है
- Mohit Subran
कोई
तो
है
जो
मन
ही
मन
मुझे
आवाज़
देता
है
मैं
जब
भी
बाँधता
हूँ
फंदा
रस्सी
टूट
जाती
है
- Mohit Subran
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मोहब्बत
कर
मोहब्बत
कर
यही
बस
कह
रहा
है
दिल
सुन
अपने
दिल
की
तू
ये
ग़ैर
की
आवाज़
थोड़ी
है
Krishnakant Kabk
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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तेरी
आवाज़
मेरा
रिज़्क
हुआ
करती
थी
तू
मुझे
भूख
से
मारेगा
ये
सोचा
नहीं
था
Rafi Raza
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बाज़ार
जा
के
ख़ुद
का
कभी
दाम
पूछना
तुम
जैसे
हर
दुकान
में
सामान
हैं
बहुत
आवाज़
बर्तनों
की
घर
में
दबी
रहे
बाहर
जो
सुनने
वाले
हैं,
शैतान
हैं
बहुत
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Aalok Shrivastav
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वैसे
तो
उसका
नाम
नहीं
हाफ़िज़े
में
अब
मुमकिन
है
रूबरू
जो
कभी
हो,
पुकार
दूँ
Bhaskar Shukla
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लहजा
कि
जैसे
सुब्ह
की
ख़ुश्बू
अज़ान
दे
जी
चाहता
है
मैं
तिरी
आवाज़
चूम
लूँ
Bashir Badr
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बहुत
कुछ
बोलना
है
पर
अभी
ख़ामोश
रहने
दो
ख़मोशी
बोलती
है
तो,
बड़ी
आवाज़
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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जब
उसने
पलट
कर
नहीं
देखा
तो
ये
जाना
आवाज़
लगाने
में
भी
नुक़सान
बहुत
है
Imtiyaz Khan
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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नहीं
उतरा
है
कब
से
एक
क़तरा
भी
बयाबाँ
में
कि
ख़ुश्की
फैलती
ही
जा
रही
है
दूर
मिज़्गाँ
में
दिखें
बहती
अगर
आँखें
यूँँ
करना
बहने
देना
तुम
बहुत
मुश्किल
से
आती
है
रवानी
चश्म-ए-वीराँ
में
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Mohit Subran
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मुझे
ग़म
नहीं
दिल
ग़मों
से
भरा
है
मुझे
ये
ख़ुशी
है
ये
ख़ाली
नहीं
है
Mohit Subran
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बहुत
मुश्किल
है
मैं
इस
सख़्त-हालत
से
निकल
पाऊँ
बहुत
मुमकिन
है
मैं
शायद
इसी
हालत
में
मर
जाऊँ
Mohit Subran
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बना
के
इक
बहाना
खींच
ले
इस
जिस्म
से
जाँ
को
क़ज़ा
मेरी
बचा
ले
ख़ुद-कुशी
के
दाग़
से
मुझको
Mohit Subran
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जो
ख़ाली
पेट
हैं
उनकी
मुराद
है
रोटी
वो
जिनके
पेट
भरे
हैं
जहान
चाहते
हैं
Mohit Subran
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