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Mohit Subran
jism ruk jaayega tira jis pe
jism ruk jaayega tira jis pe | जिस्म रुक जाएगा तिरा जिस पे
- Mohit Subran
जिस्म
रुक
जाएगा
तिरा
जिस
पे
और
फिर
वो
ही
ज़िन्दगी
होगा
सोचता
हूँ
कि
कौन
शख़्स
आख़िर
तेरे
इस
दिल
को
आख़िरी
होगा
- Mohit Subran
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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तुम्हें
भी
साँस
लेने
की
कमी
हो
तुम्हें
भी
ज़िंदगी
ठुकरा
के
जाए
Ambar
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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मुझे
फुर्सत
नहीं
अब
वाक़ई
में
बहुत
मसरूफ
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
में
Reshma Shaikh
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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ज़िंदगी
है
या
कोई
तूफ़ान
है
हम
तो
इस
जीने
के
हाथों
मर
चले
Khwaja Meer Dard
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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कोई
तो
बात
उस
जहाँ
में
है
जो
गया
लौट
के
नहीं
आया
Mohit Subran
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देखे
हैं
तेरे
जल्वे
भी
लेकिन
हम
तेरी
सादगी
पे
मरते
हैं
Mohit Subran
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न
जाने
कब
भला
मुझ
पे
गिरेगी
बर्क़
आकर
न
जाने
कब
भला
छूटूँगा
इस
ज़िंदान
से
मैं
न
जाने
कब
भला
टूटेगी
सर
पे
कोई
आफ़त
न
जाने
कब
भला
जाऊँगा
आख़िर
जान
से
मैं
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Mohit Subran
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ये
दुनिया
एक
मंडी
है
नहीं
इस
के
सिवा
कुछ
भी
यहाँ
जिस
को
भी
देखो
बिकने
को
तैयार
बैठा
है
Mohit Subran
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गुज़ार
लेते
हैं
जैसे
भी
आप
दिन
लेकिन
ये
हम
ही
जानते
हैं
रात
कैसे
कटती
है
Mohit Subran
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